
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के प्रविधानों को लेकर हाई कोर्ट में नई याचिका दायर की गई है। ट्राईबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका में शिक्षा का अधिकार अधिनियम की धारा 23(2) की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है।
याचिका में कहा गया है कि धारा 23(2) के तहत शिक्षकों को नियुक्ति के बाद निर्धारित अवधि में योग्यता हासिल करने का प्रविधान किया गया है, जो शिक्षकों के अधिकारों और सेवा शर्तों को प्रभावित करता है।
याचिकाकर्ता संगठन ने इस प्रविधान को चुनौती देते हुए न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग की है। हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया व न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद केंद्र सरकार, राज्य सरकार और नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
आदेश में प्रतिवादियों को प्रक्रिया शुल्क जमा करने के निर्देश के साथ दो सप्ताह में जवाब प्रस्तुत करने की प्रक्रिया शुरू करने को कहा गया है। याचिका की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कैलाश चंद्र घिल्डियाल और अधिवक्ता वरिजा घिल्डियाल ने पैरवी की।
केंद्र सरकार की ओर से असिस्टेंट सालिसिटर जनरल सुनील कुमार जैन ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से अधिवक्ता अर्नव तिवारी के साथ पक्ष रखा, जबकि राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता निलेश यादव उपस्थित हुए। हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 31 अगस्त की तारीख निर्धारित की है।
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