सुनवाई का मौका दिए बिना कोई नियुक्ति निरस्त नहीं की जा सकती, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने जिला पंचायत सीईओ का आदेश किया खारिज
उमरिया निवासी प्रियंका यादव की ओर से अधिवक्ता योगेश सिंह बघेल ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता को उक्त पद पर नियुक्ति दी गई। एक शिकायत पर ...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 23 Apr 2026 07:49:18 PM (IST)Updated Date: Thu, 23 Apr 2026 07:52:11 PM (IST)
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट।नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति मनिंदर सिंह भट्टी की एकलपीठ ने महत्वपूर्ण आदेश में साफ किया कि सुनवाई का मौका दिए बिना किसी की भी नियुक्ति निरस्त नहीं की जा सकती। जस्टिस एमएस भट्टी की एकलपीठ ने सीईओ जिला पंचायत उमरिया के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसके तहत ग्राम सभा मोबिलाइजर की नियुक्ति निरस्त कर दी गई थी।
उमरिया निवासी प्रियंका यादव की ओर से अधिवक्ता योगेश सिंह बघेल ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता को उक्त पद पर नियुक्ति दी गई। एक शिकायत पर जांच के बाद नियुक्ति निरस्त कर दी गई।
दलील दी गई कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का घोर उल्लंघन करते हुए नियुक्ति निरस्त करने का आदेश पारित किया गया है। आदेश पारित होने से पहले याचिकाकर्ता को सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया और उसकी जगह अनावेदिका रंजना यादव को नियुक्ति दे दी गई।
कोर्ट ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि उक्त आदेश पारित करने से पहले सीईओ ने याचिकाकर्ता को सुनवाई का कोई अवसर नहीं दिया।
याचिकाकर्ता की बात नहीं सुनी गई और इसलिए उसे अनसुना कर दोषी ठहराया गया। प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन राज्य के किसी भी निकाय द्वारा किया जाना आवश्यक है। कोर्ट ने सीईओ को कहा कि दोनों पक्षों को सुनवाई का पर्याप्त अवसर देते हुए नए सिरे से कार्रवाई करें।