मध्य प्रदेश के 30 हजार से ज्यादा नर्सिंग छात्रों को बड़ा झटका, हाईकोर्ट की अनुमति के बिना नहीं होंगी परीक्षाएं
कोर्ट ने कहा कि कोर्ट की अनुमति बिना नर्सिंग कालेजों की आगामी परीक्षााएं नहीं होंगी। मामले पर अगली सुनवाई 28 अप्रैल को होगी। ...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 24 Apr 2026 08:37:03 PM (IST)Updated Date: Fri, 24 Apr 2026 08:38:14 PM (IST)
एमपी नर्सिंग फर्जीवाड़ा पर हाईकोर्ट सख्तHighLights
- हाई कोर्ट ने परीक्षा पर लगाई रोक
- फर्जी नर्सिंग कॉलेज मामले में सख्ती
- अगली सुनवाई 28 अप्रैल को
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल व न्यायमूर्ति अवनींद्र कुमार सिंह की युगलपीठ के समक्ष शुक्रवार को प्रदेश के बहुचर्चित नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़े से जुड़े मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने कहा कि कोर्ट की अनुमति बिना नर्सिंग कालेजों की आगामी परीक्षााएं नहीं होंगी। मामले पर अगली सुनवाई 28 अप्रैल को होगी।
2020-21 में खुले सैकड़ों फर्जी नर्सिंग कॉलेज
ला स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल ने जनहित याचिका में प्रदेश में 2020-21 में खुले सैकड़ों फर्जी नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी। सीबीआई जांच में लगभग 800 नर्सिंग कालेजों में से करीब 600 कॉलेज अनुपयुक्त या कमियों से भरे पाए गए थे। इन संस्थानों में भवन, लैब, लाइब्रेरी, अनुभवी शिक्षक और 100 बिस्तरों वाले अस्पताल जैसी अनिवार्य सुविधाओं की भारी कमी पायी गई थी।
परीक्षाएं 28 अप्रैल से प्रस्तावित
एसोसिएशन ने आवेदन पेश कर आरोप लगाया था कि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले कागजी-अमानक कॉलेजों में जीएनएम कोर्स संचालित करने वाले जो 117 नर्सिंग कालेज सीबीआई जांच में अपात्र पाए गए थे। एमपी नर्सिंग काउंसिल उनके छात्रों को सूटेबल कालेजों में ट्रांसफर करने के स्थान पर उन कालेजों की अंतिम वर्ष की परीक्षाएं ले रहा है। ये परीक्षाएं 28 अप्रैल से प्रस्तावित है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस फैसले से 30 हजार से ज्यादा छात्र प्रभावित होंगे।
सुनवाई के बाद नर्सिंग काउंसिल की अंडरटेकिंग रिकार्ड पर लेकर युगलपीठ ने कहा कि हाई कोर्ट की अनुमति के बिना कोई भी परीक्षा का आयोजन नहीं होगा।
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