
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। इंदौर की हिंदू युवती अंकिता राठौर और जबलपुर के मुस्लिम युवक हसनैन अंसारी के अंतरधार्मिक विवाह से जुड़ा विवाद अब विशेष विवाह अधिनियम की संवैधानिकता के सवाल तक पहुंच गया है।
अंकिता के पिता हीरालाल राठौर और विश्व हिंदू परिषद धर्म प्रसार विभाग के दिग्विजय सिंह ने हाई कोर्ट में विशेष विवाह अधिनियम, 1954 की धारा 4 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी है।
याचिका में मुस्लिम पति की संपत्ति में हिंदू पत्नी के उत्तराधिकार के अधिकार सहित विवाह के बाद उत्पन्न होने वाले कानूनी प्रश्न उठाए गए हैं। हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका कर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अशोक लालवानी ने पक्ष रखा।
दरअसल, अंकिता राठौर और हसनैन अंसारी ने विशेष विवाह अधिनियम के तहत विवाह के लिए आवेदन किया था। इस मामले में पहले भी हाई कोर्ट में याचिकाएं और अपीलें दायर हो चुकी हैं।
नवंबर 2024 में अंकिता के पिता हीरालाल राठौर की अपील पर हाई कोर्ट की युगलपीठ ने एकलपीठ के उस आदेश पर रोक लगाई थी, जिसमें विशेष विवाह अधिनियम के तहत विवाह की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए थे। उस समय भी हीरालाल की ओर से अधिवक्ता अशोक लालवानी ने पैरवी की थी।
नई याचिका में विशेष विवाह अधिनियम की धारा 4 को चुनौती देते हुए अंतरधार्मिक विवाह की वैधानिकता और उसके परिणामस्वरूप उत्पन्न होने वाले उत्तराधिकार के अधिकारों पर सवाल उठाया गया है।
याचिकाकर्ताओं का मुख्य प्रश्न है कि विशेष विवाह अधिनियम के तहत मुस्लिम युवक और हिंदू युवती का विवाह होने के बाद हिंदू पत्नी को मुस्लिम पति की संपत्ति में उत्तराधिकार का अधिकार किस कानून के तहत मिलेगा।
याचिका में विशेष विवाह अधिनियम और मुस्लिम पर्सनल ला के बीच उत्पन्न होने वाली कानूनी स्थिति का भी मुद्दा उठाया गया है। इसके अलावा विवाह के बाद पत्नी और संतान के उत्तराधिकार तथा व्यक्तिगत कानून से जुड़े प्रश्नों पर भी न्यायालय से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई है।
अंकिता-हसनैन प्रकरण में पहले सुरक्षा और विवाह की अनुमति को लेकर हाईकोर्ट में मामला पहुंचा था। उपलब्ध न्यायिक रिपोर्टों के अनुसार दोनों ने विशेष विवाह अधिनियम के तहत विवाह के लिए आवेदन किया था और सुरक्षा की मांग की थी। इसके बाद अंकिता के पिता ने एकलपीठ के आदेश को चुनौती दी थी।
युगलपीठ ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए आगे की विवाह प्रक्रिया पर रोक लगाई थी। अब नई याचिका में विवाद का दायरा केवल अंकिता और हसनैन के विवाह तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विशेष विवाह अधिनियम की धारा 4 की संवैधानिक वैधता को ही चुनौती दी गई है। केंद्र सरकार का जवाब मिलने के बाद हाई कोर्ट इस चुनौती पर आगे सुनवाई करेगा।
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