
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए गणवेश खरीदने की राशि जारी करने की तैयारी अब शुरू हुई है, लेकिन नए शिक्षण सत्र के साढ़े चार महीने बीतने के बाद शासन को इसकी याद आई है।
अप्रैल से शुरू हुए सत्र में अब अक्टूबर के तीसरे सप्ताह में विद्यार्थियों के खातों में 600 रुपये पहुंचाने का प्रस्ताव है। सवाल यह है कि इतनी कम राशि में बच्चों के लिए दो यूनिफॉर्म कैसे खरीदी जाएंगी?
गणवेश के लिए राशि सीधे विद्यार्थियों या उनके अभिभावकों के बैंक खातों में भेजने की व्यवस्था बनाई गई है। हालांकि, इस व्यवस्था के सामने एक बड़ी चुनौती यह भी है कि कुछ अभिभावक राशि का उपयोग बच्चों की यूनीफॉर्म खरीदने के बजाय दूसरे कामों में कर लेते हैं।
इसका खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ता है और वे बिना पूरी गणवेश के स्कूल पहुंचने को मजबूर होते हैं। ऐसे में केवल राशि जारी करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि उसका उपयोग निर्धारित उद्देश्य के लिए हो।
राज्य शिक्षा केंद्र के निर्णय के अनुसार, शैक्षणिक सत्र 2026-27 में शासकीय स्कूलों में कक्षा पहली से आठवीं तक अध्ययनरत विद्यार्थियों को गणवेश की राशि प्रदान की जानी है। इसमें एकलव्य विद्यालय और कन्या शिक्षा परिसर को शामिल नहीं किया गया है।
गणवेश की राशि को लेकर अभिभावकों की चिंता यह है कि 600 रुपये में दो यूनीफॉर्म की व्यवस्था करना आसान नहीं है। कपड़े की कीमत, सिलाई और अन्य खर्चों को देखते हुए यह राशि कम पड़ सकती है। वहीं, बच्चों को पूरे साल साफ-सुथरी यूनीफॉर्म में स्कूल भेजने के लिए कम से कम दो जोड़ी कपड़ों की जरूरत होती है।
ऐसे में शासन को गणवेश की राशि बढ़ाने पर विचार करना चाहिए। इसके साथ ही बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और त्वचा के अनुकूल कपड़े उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी जरूरी है, ताकि कम कीमत के चक्कर में उनकी सेहत और सुविधा से समझौता न करना पड़े।
गणवेश की राशि को लेकर छात्राओं के संबंध में भी स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है। छात्राओं के लिए राशि और गणवेश की व्यवस्था को लेकर अलग से क्या प्रावधान किया गया है, इसे लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। छात्राओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए गणवेश की व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक है।
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