
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मध्य प्रदेश में प्रमोशन में आरक्षण के बहुचर्चित मामले में सोमवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया व न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ सुनवाई करेगी। पिछली सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह की अनुपलब्धता का हवाला देते हुए समय मांगा गया था, जिसे स्वीकार करते हुए कोर्ट ने 13 जुलाई की तारीख तय की थी। कोर्ट ने यह भी संकेत दिए थे कि वर्षों से लंबित इस प्रकरण का शीघ्र अंतिम निराकरण किया जाएगा।
दरअसल, विगत सुनवाई में सामान्य वर्ग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज शर्मा ने सरकार पर विभागीय पदोन्नति समितियों (डीपीसी) की प्रक्रिया तेज करने का आरोप बढ़ाते हुए दावा किया था कि 15 विभागों में पदोन्नति आदेश जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि पूर्व में अंतिम निर्णय तक डीपीसी नहीं करने का मौखिक आश्वासन दिया गया था और आवश्यकता पड़ने पर उसका वीडियो भी प्रस्तुत किया जा सकता है।
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वहीं अजाक्स की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर ठाकुर ने तर्क दिया था कि न्यायालय के रिकार्ड में ऐसी किसी रोक का लिखित आदेश नहीं है, इसलिए केवल कथित मौखिक आश्वासन के आधार पर पदोन्नति प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाई जा सकती। पिछली सुनवाई में हाई कोर्ट ने नई पदोन्नतियों पर कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई थी। अब सभी की निगाहें सोमवार की सुनवाई पर टिकी हैं।