
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। पश्चिम मध्य रेलवे के जबलपुर रेल मंडल की तीन प्रमुख स्पेशल ट्रेनों को नियमित ट्रेन का दर्जा दिए जाने के बाद अब यात्रियों की उम्मीदें जबलपुर-अयोध्या और जबलपुर-कोयंबटूर स्पेशल ट्रेनों पर टिक गई हैं।
हाल ही में रीवा-जबलपुर-मुंबई, जबलपुर-पुणे तथा जबलपुर-बांद्रा टर्मिनस के बीच संचालित स्पेशल ट्रेनों को नए नंबरों के साथ नियमित गाड़ियों के रूप में चलाया जाना शुरू कर दिया गया है। लंबे समय से संचालित हो रही दो अन्य स्पेशल ट्रेनों को भी नियमित किए जाने की मांग तेज हो गई है। कुछ संगठनों ने भी रेलवे को पत्र भेजकर ट्रेनों के नियमित करने की आवश्यकता बताई है।
जबलपुर-कोयंबटूर स्पेशल ट्रेन कई वर्षों से लगातार संचालित हो रही है और दक्षिण भारत जाने वाले यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण साधन बनी हुई है। इसी तरह जबलपुर-अयोध्या स्पेशल ट्रेन भी समय-समय पर विस्तार पाते हुए लगभग पूरे वर्ष किसी न किसी अवधि में संचालित होती रही है।
जबलपुर से कोयंबटूर और अयोध्या के बीच सीधी ट्रेन नहीं है, इसलिए यह ट्रेन यात्रियों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रही है। दोनों ट्रेनों में यात्रियों की अच्छी संख्या रहती है, जिसके चलते इन्हें स्थायी रूप से चलाने की मांग लगातार उठती रही है।
सूत्रों के अनुसार पश्चिम मध्य रेलवे जोन की ओर से दोनों ट्रेनों को नियमित करने का प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेजा जा चुका है। अब अंतिम निर्णय रेलवे बोर्ड स्तर पर होना है। यदि मंजूरी मिलती है तो जबलपुर से उत्तर और दक्षिण भारत के कई महत्वपूर्ण धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों तक सीधी रेल सुविधा स्थायी रूप से उपलब्ध हो जाएगी।
जबलपुर-अयोध्या ट्रेन का मार्ग धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। यह ट्रेन प्रयागराज छिवकी और वाराणसी कैंट के रास्ते संचालित होती है। इसके माध्यम से श्रद्धालुओं को मैहर स्थित मां शारदा धाम, मिर्जापुर के समीप मां विंध्यवासिनी मंदिर, वाराणसी के काशी विश्वनाथ धाम एवं अयोध्या में भगवान श्रीराम की नगरी तक पहुंचने की सुविधा मिलती है। पूर्वांचल और महाकोशल के बीच आवाजाही सुलभ कराती है।
जबलपुर-कोयंबटूर ट्रेन मध्य भारत को पश्चिमी तट और दक्षिण भारत से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी है। यह ट्रेन पनवेल (नवी मुंबई), रत्नागिरी, मडगांव (गोवा), उडुपी, मंगलुरु, कालीकट और पलक्कड़ जैसे प्रमुख शहरों तक सीधी यात्रा की सुविधा देती है। गोवा और केरल जाने वाले पर्यटकों के साथ-साथ नवी मुंबई नौकरी, शिक्षा और व्यवसाय के लिए यात्रा करने वाले लोगों को भी इससे लाभ मिलता है।
दोनों ट्रेनों के नियमित होने से कई समस्याओं का समाधान होगा। इसके अलावा स्पेशल ट्रेनों के संचालन की अवधि बार-बार बढ़ाए जाने से यात्रियों में अनिश्चितता बनी रहती है। नियमित ट्रेन बनने पर समय सारिणी स्थायी होगी, परिचालन बेहतर होगा और स्पेशल शुल्क समाप्त होने से किराए में भी कमी आएगी।
पश्चिम मध्य रेल की पूर्व में साप्ताहिक जबलपुर-मंडुआडीह (बनारस) ट्रेन संचालित थी। जबलपुर होकर रीवा-पनवेल तक भी स्पेशल ट्रेन चलाई गई थी। दोनों ही ट्रेनों को पर्याप्त यात्री मिलते थे, लेकिन तकनीकी कारण बताकर रेलवे ने दोनों ट्रेन का संचालन आगे जारी रखने से हाथ खींच लिए।
इन दोनों ट्रेन के बंद होने के बाद संबंधित स्थानों के लिए शहर से कोई सीधी ट्रेन ही है। जबलपुर-कोयंबटूर का संचालन पनवेल और जबलपुर-अयोध्या ट्रेन वाराणसी केंट होकर चलती है। यात्रियों का कहना है कि यह पूर्व में बंद की गई दोनों ट्रेन की कमी पूरी करेंगी।
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