भोपाल के कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के विरुद्ध एफआइआई आर का आदेश निरस्त, सुप्रीम कोर्ट ने पलटा हाई कोर्ट का आदेश
दरअसल, हाई कोर्ट ने पुलिस आयुक्त, भोपाल को तत्काल एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे। मामला फर्जी सेल डीड पर इंदिरा प्रियदर्शनी कालेज के संचालन से जुड ...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 09 Mar 2026 10:33:59 PM (IST)Updated Date: Mon, 09 Mar 2026 10:39:27 PM (IST)
कांग्रेस विधायक आरिफ मसूदHighLights
- मामला फर्जी सेल डीड पर इंदिरा प्रियदर्शनी कॉलेज संचालन से जुड़ा है।
- कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक को एसआइटी गठित करने भी कहा था।
- हाई कोर्ट के इस आदेश को आरिफ ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी व न्यायमूर्ति अतुल चंदूरकर की युगलपीठ ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें भोपाल के कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के विरुद्ध एफआइआर के निर्देश दिए गए थे।
दरअसल, हाई कोर्ट ने पुलिस आयुक्त, भोपाल को तत्काल एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे। मामला फर्जी सेल डीड पर इंदिरा प्रियदर्शनी कॉलेज के संचालन से जुड़ा है। कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक को एसआईटी गठित करने भी कहा था। हाई कोर्ट के इस आदेश को आरिफ ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
भोपाल कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद पर हाई कोर्ट ने लगाया 10 हजार का जुर्माना
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार का जवाब आने से पहले इस तरह के अंतरिम आदेश की जरूरत नहीं थी। हाई कोर्ट ने आदेश में कड़ी शर्तें लगाई गईं और पुलिस कमिश्नर को एफआइआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया। पहली नज़र में यह आब्ज़र्वेशन सही नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट में आरिफ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि हाई कोर्ट ने मामले में सरकार का जवाब आने से पहले ही एफआईआर दर्ज करने और एसआईटी गठित करने का आदेश दिया, जो कि अनुचित है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चूंकि याचिका हाई कोर्ट में पेंडिंग है, इसलिए सभी पक्षों को निर्देश दिया जाता है कि वे अपनी-अपनी दलीलें जल्द से जल्द पूरी करें और इसमें शामिल मुद्दों पर हाई कोर्ट द्वारा अपने मेरिट के आधार पर फैसला सुनाया जाए।
दरअसल, इंदिरा प्रियदर्शी कालेज, भोपाल की मान्यता निरस्त किए जाने के विरुद्ध कांग्रेस विधायक मसूद हाई कोर्ट पहुंचे थे। जहां से राहत मिलने के स्थान पर एफआईआर के निर्देश की गाज गिर गई। मप्र शासन, उच्च शिक्षा विभाग ने इंदिरा प्रियदर्शी कालेज की जांच के उपरांत नौ जून, 2025 को मान्यता निरस्त करने का आदेश जारी किया था।