
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के पनपथा बफर क्षेत्र के खेरवा टोला में रविवार को बाघ के हमले से महिला की मौत और बाद में इस बाघ की भी मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। वन विभाग ने उमरिया जिले में रविवार को बाघ के शव का पोस्टमार्टम कराया, उसमें यह तथ्य सामने आया कि गांव में घुसा बाघ ट्रैंक्यूलाइज किए जाने से पहले ही मर चुका था।
इस रिपोर्ट की पुष्टि के लिए जबलपुर वेटरनरी के स्कूल आफ वाइल्ड लाइफ की टीम ने सोमवार को बाघ का दूसरा पोस्टमार्टम करके 15 अंगों को जांच के लिए सुरक्षित निकाला। इनकी जांच लैब में की जाएगी। वहीं, अब दूसरे पोस्टमार्टम की रिपोर्ट का इंतजार है। इसके बाद ही बाघ की मौत का वास्तविक कारण सामने आ सकेगा।
इस बीच, बाघ की मौत के कारणों की जांच राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने भी शुरू कर दी है। बाघ के शव का दूसरा पोस्टमार्टम करने के निर्देश पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ समीता राजौरा ने दिए। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर डा़ अनुपम सहाय ने बताया कि दूसरे पोस्टमार्टम की आवश्यकता इसलिए पड़ी, क्योंकि जिस डाक्टर ने ट्रैंक्यूलाइज किया था, उसी ने बाघ के शव का पोस्टमार्टम भी किया।
ट्रैंक्यूलाइज करने वाली टीम की ओर से वन विभाग के अधिकारियों ने दावा किया कि घटनास्थल पर जब बाघ दिखाई दिया, तब उसके शरीर में किसी प्रकार की स्पष्ट हरकत नहीं हो रही थी। सुरक्षा और प्रोटोकाल के तहत बिना निस्तेज किए उसके करीब जाना जोखिम भरा था। इसी कारण टीम ने बाघ को ट्रैंक्यूलाइज किया।
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भूख-प्यास से मौत की भी आशंका
बाघ की मौत को लेकर यह चर्चा भी सामने आई कि उसकी मौत भूख और प्यास से हुई है। फील्ड डायरेक्टर डा़ सहाय का कहना है कि हम इस एंगल पर भी जांच कर रहे हैं। मौत का कोई भी कारण हो सकता है। दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के पहले कुछ भी कहना विधिसंगत नहीं होगा।
पहले हुए शव परीक्षण में यह बात सामने आई कि बाघ की मौत बेहोशी की डोज देने के पहले ही हो गई थी। जबलपुर में शव से करीब 15 सैंपल निकाले गए, जिसमें किडनी, लीवर समेत अन्य अंग शामिल हैं। अब इन अंगों की जांच लैब में की जाएगी। बाघ का शवदाह जबलपुर में ही किया गया है। -डा. अनुपम शाह, फील्ड डायरेक्टर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व