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हाई कोर्ट के आदेश के बाद ट्रांसको सक्रिय, जबलपुर में खतरनाक निर्माणों की फिर होगी पहचान

कंपनी ने जिला प्रशासन से कार्रवाई में सहयोग भी मांगा था। अब जोखिम वाले क्षेत्रों का दोबारा चिह्नांकन कर लंबित मामलों में कार्रवाई की तैयारी है।

By Pankaj TiwariEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Sat, 17 Oct 2026 10:29:42 PM (IST)Updated Date: Sat, 17 Oct 2026 10:29:42 PM (IST)
हाई कोर्ट के आदेश के बाद ट्रांसको सक्रिय, जबलपुर में खतरनाक निर्माणों की फिर होगी पहचान
जिला प्रशासन को भी इन्हें हटाने के लिए कई बार पत्र लिखे गए हैं। सौजन्‍य एआई

HighLights

  1. 223 निर्माण पहले ही चिह्नित
  2. नोटिस के बावजूद कार्रवाई नहीं
  3. कार्रवाई को लेकर सुरक्षा पर सवाल

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। शहर में अति उच्चदाब बिजली लाइनों के नीचे और आसपास हो रहे निर्माणों का मामला हाई कोर्ट पहुंचने के बाद मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) सक्रिय हुई है।

हटाने के लिए कई बार पत्र लिखे गए

कंपनी ने ट्रांसमिशन लाइनों के निर्धारित सुरक्षा क्षेत्र में बने निर्माणों को दोबारा चिह्नित करने की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की है। ऐसे 223 निर्माण पहले ही चिह्नित कर संबंधित लोगों को नोटिस दिए जा चुके हैं, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। जिला प्रशासन को भी इन्हें हटाने के लिए कई बार पत्र लिखे गए हैं।

विशेष अभियान चलाकर पहचान की थी

एमपी ट्रांसको ने पहले विशेष अभियान चलाकर 132 केवी और 220 केवी ट्रांसमिशन लाइनों के आसपास बने मकानों और अन्य संरचनाओं की पहचान की थी। इनमें से चार अत्यधिक जोखिम वाले निर्माण हटाए जाने की जानकारी सामने आई थी।

नोटिस के बावजूद निर्माण नहीं हटाए गए

अभियान धीमा पड़ गया और कई मामलों में नोटिस के बावजूद निर्माण नहीं हटाए गए। कंपनी ने जिला प्रशासन से कार्रवाई में सहयोग भी मांगा था। अब जोखिम वाले क्षेत्रों का दोबारा चिह्नांकन कर लंबित मामलों में कार्रवाई की तैयारी है।


10 अधिकारियों से जवाब तलब

ट्रांसमिशन लाइनों के आसपास निर्माण और कालोनियों के विकास का मामला हाई कोर्ट में विचाराधीन है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अल्पेश यशवंत कोगजे और न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने ग्रीष्म जैन एवं अमित पटेल की याचिका पर राज्य शासन सहित संबंधित विभागों के 10 अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 25 नवंबर 2026 को होगी।

  • याचिका में आरोप है कि अति उच्चदाब लाइनों के नीचे और सुरक्षा क्षेत्र में मकान, पार्क तथा अन्य निर्माण हो रहे हैं।
  • कुछ स्थानों पर लाइनों के पास कालोनियां विकसित किए जाने का दावा भी किया गया है।
  • याचिकाकर्ताओं के अनुसार, एमपी ट्रांसको अधिकारियों ने जिला दंडाधिकारी को खतरे से अवगत कराया।
  • याचिका में भूमि विकास नियम, 2012 और विद्युत अधिनियम, 2003 के उल्लंघन का मुद्दा उठाया गया है।

पालन नहीं होने से लोगों की जान को खतरा हो सकता

सुरक्षा मानकों का पालन नहीं होने से लोगों की जान को खतरा हो सकता है। तेज हवा में तारों के झूलने और भवनों के नजदीक होने से दुर्घटना की आशंका रहती है। इससे बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है। अब देखना होगा कि दोबारा चिह्नांकन के बाद लंबित मामलों में कितनी तेजी से कार्रवाई होती है।

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