
नईदुनिया प्रतिनिधि, झाबुआ। जिला मुख्यालय से 20 किमी दूर कालीदेवी थाना क्षेत्र के भूतेड़ी में गुरुवार हर ग्रामीण की आंखों में आंसू थे। दरअसल राजस्थान के दौसा जिले में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर हुए भीषण बस हादसे में जान गंवाने वाले 31 वर्षीय धर्मसिंह भूरिया का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा।
यहां गमगीन माहौल में उनका अंतिम संस्कार किया गया। धर्मसिंह के मौत से उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उनकी पत्नी ज्योति और छह बेटियां आरुषि, सोनल, मोनल, पायल, श्रद्धा एवं सबसे छोटी चार माह की हार्दिका बेसहारा हो गई हैं। घर के कमाऊ सदस्य के जाने से इन बच्चियों के सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया है।
हादसे का आंखों देखा हाल बताते हुए धर्मसिंह के साथ यात्रा कर रहे उनके साथी कालू सिंगाड़ ने बताया कि वे गुजरात के मोरबी से साथ काम कर लौट रहे थे। दिल्ली से इंदौर के लिए निकली स्लीपर बस में वे ऊपरी कैबिन में सो रहे थे कि तभी रात करीब ढाई बजे जोरदार धमाके के साथ बस रुक गई। टक्कर से धर्मसिंह नीचे गिर गए थे।
कालू ने हिम्मत जुटाकर बस का कांच तोड़ा और बाहर निकले, जिसके बाद वे वापस अंदर जाकर धर्मसिंह को बाहर खींच लाए। धर्मसिंह गंभीर रूप से घायल थे, लेकिन उनकी सांसें चल रही थीं। उन्होंने तत्काल एम्बुलेस को काल किया। पांच मिनट में एम्बुलेंस आई गई और करीब 15 किमी दूर दौसा के चिकित्सालय ले जाया गया।कालू ने बताया कि कुछ ही मिनटों में बस और ट्रेलर में भीषण आग लग गई और देखते ही देखते सब कुछ जलकर राख हो गया।
ग्रामीणों के अनुसार झाबुआ जिले के हजारों लोग दूसरे राज्यों में काम करते हैं। यहां रोजगार न होने से कोई गुजरात, महाराष्ट्र तो कोई राजस्थान जाते हैं। काम के दौरान हर साल कोई हादसा या दुर्घटना होती है।