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नेटवर्क ने छीनी नौकरी, भोपाल की दखल से लौटी चार सरकारी स्कूलों की कक्षा में रौनक

परिणामस्वरूप पिछले सत्र में सेवाएं देने वाले 15 अतिथि शिक्षकों की इस सत्र में करीब एक माह तक जाइनिंग अटक गई और छात्राें की पढ़ाई प्रभावित होती रही।

By Mukesh TiwariEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Fri, 24 Jul 2026 02:02:12 PM (IST)Updated Date: Fri, 24 Jul 2026 02:02:12 PM (IST)
नेटवर्क ने छीनी नौकरी, भोपाल की दखल से लौटी चार सरकारी स्कूलों की कक्षा में रौनक
शासकीय नैंगवा स्कूल में अध्ययन करते छात्र। सौजन्य स्‍कूल

HighLights

  1. चार सरकारी स्कूलों में अतिथि शिक्षकों के लिए सबसे बड़ी बाधा
  2. कार्यरत शिक्षकों की पोर्टल पर उपस्थिति लगातार शून्य दर्ज रही
  3. 20 दिनों तक रूकी छात्रों की पढ़ाई फिर से शुरू हुई

नईदुनिया प्रतिनिधि, कटनी। शिक्षा विभाग की आनलाइन उपस्थिति व्यवस्था रीठी विकासखंड के चार सरकारी स्कूलों में अतिथि शिक्षकों के लिए सबसे बड़ी बाधा बन गई।

शिक्षकों की पोर्टल पर उपस्थिति लगातार शून्य

जिन स्कूलों में मोबाइल नेटवर्क तक उपलब्ध नहीं है, वहां कार्यरत शिक्षकों की पोर्टल पर उपस्थिति लगातार शून्य दर्ज होती रही।

हाजिरी दर्ज नहीं होने से विभागीय रिकार्ड में अनुपस्थित

मामला शासकीय स्कूल नैंगवा, कुड़ाई और रमपुरा का है, जहां शिक्षक स्कूल पहुंचकर पढ़ा तो रहे थे, लेकिन ऑनलाइन हाजिरी दर्ज नहीं होने से विभागीय रिकार्ड में अनुपस्थित माने जा रहे थे।

नेटवर्क विहीन स्कूलों की वास्तविक स्थिति रखी

स्थानीय स्तर पर समाधान नहीं निकलने पर अतिथि शिक्षक भोपाल पहुंचे और अधिकारियों के समक्ष नेटवर्क विहीन स्कूलों की वास्तविक स्थिति रखी।

उनकी पुनः जाइनिंग की प्रक्रिया शुरू कराई

विभाग ने हस्तक्षेप कर उनकी पुनः जाइनिंग की प्रक्रिया शुरू कराई। जिसके बाद सत्र में लगभग 20 दिनों तक रूकी छात्रों की पढ़ाई फिर से शुरू हुई और स्कूलों में रौनक लौटी।

चार स्कूलों में अतिथियों के भरोसे पढ़ाई

शासकीय उच्चतर माध्यमिक स्कूल नैंगवा, शासकीय माध्यमिक शाला नैंगवा, माध्यमिक शाला रमपुरा और प्राथमिक शाला कुड़ाई में छात्रों की पढ़ाई अतिथि शिक्षकों के भरोसे है।

नियमित शिक्षकों की नियुक्ति बहुत कम

आदिवासी गांव जंगल के बीच बसे हैं और वहां पर नियमित शिक्षकों की नियुक्ति बहुत कम है। इसके चलते हर साल जुलाई की शुरुआत के साथ ही चारों स्कूलों में अतिथि शिक्षकों की तैनाती होती रही है।

300 के लगभग छात्रा-छात्राएं यहां अध्ययन करते हैं

हायर सेकंड्ररी नैंगवा में नौ, माध्यमिक शाला में तीन, रमपुरा में दो और कुड़ाई में एक अतिथि शिक्षक की नियुक्ति होती है। चारों स्कूलों को मिलाकर आदिवासी परिवार के 300 के लगभग छात्रा-छात्राएं यहां अध्ययन करते हैं।

स्कूलों के पास नहीं मिलता नेटवर्क

नैंगवा ग्राम पंचायत के तीनों गांवों जंगल के बीच में हैं और इसके चलते यहां पर मोबाइल नेटवर्क की समस्या है। गांव के बाहर कहीं-कहीं नेटवर्क मिलता है और उसके माध्यम से ही ग्रामीण अपना संवाद करते हैं।

पूर्व में ग्राम पंचायतों के ऑनलाइन कार्य पेड़ के नीचे होते थे

पूर्व में ग्राम पंचायतों के ऑनलाइन कार्य भी कर्मचारियों को गांव के बाहर पेड़ के नीचे बैठकर करने पड़े थे। शिक्षा विभाग के आनलाइन हाजिरी लगाने के आदेश थे।

ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराना चुनौती

यहां के शिक्षकों व अतिथि शिक्षकों के सामने ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराना चुनौती रहा है और इसके चलते पिछले सत्र में अतिथि शिक्षकों की उपस्थिति आफ लाइन ही जिला स्तर से लगाई जाती रही और मानदेय का भुगतान किया गया।

एप में शून्य, तो नहीं खुला पोर्टल

नैंगवा, रमपुरा व कुड़ाई के अतिथि शिक्षकों की आनलाइन एप में पिछले सत्र में हाजिरी दर्ज नहीं हुई। जिसके चलते डिजिटल व्यवस्था के कारण उनकी उपस्थिति पोर्टल पर शून्य दर्ज थी।

ज्वाइनिंग होनी थी तो पाेर्टल ओपन ही नहीं हुआ

जब जुलाई में अतिथि शिक्षकों की आनलाइन पुन: ज्वाइनिंग होनी थी तो पाेर्टल ओपन ही नहीं हुआ। इसको लेकर अतिथि शिक्षकों व स्कूलों के प्रभारियों ने जिला स्तर पर पहुंचकर अधिकारियों से चर्चा की।

पढ़ाई एक जुलाई से लगातार प्रभावित रही

पोर्टल संबंधी पूरी प्रक्रिया भोपाल से होने के कारण जिला स्तर से भी पोर्टल को खोला नहीं जा सका। इस बीच छात्राें की पढ़ाई एक जुलाई से लगातार प्रभावित रही और छात्रों के साथ उनके अभिभावक भी परेशान होकर उिजीटल व्यवस्था की खामी का खामियाजा भुगतते रहे।


भोपाल पहुंचे, तब निपटी समस्या

नैंगवा, रमपुरा व कुड़ाई के अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति भी अधर में थी। ऐसे में वे भी परेशान थे और उनके सामने नौकरी की समस्या बनी। जिसके बाद अतिथि शिक्षक भोपाल पहुंचे और बहोरीबंद विधायक प्रणय पांडेय के सहयोग से अधिकारियों से मिलकर पूरी समस्या उनके सामने रखी।

अतिथि शिक्षक के पहुंचते ही रौनक लौटी

भोपाल में अधिकारियों ने उनकी बात सुनी और समस्या के संबंध में जिला स्तर से जानकारी लेते हुए पोर्टल को ओपन कराते हुए अतिथि शिक्षकों की पुन: ज्वाइनिंग कराई गई। जिसके चलते 20 दिन बाद अतिथि शिक्षक स्कूलों में पहुंचे और छात्रों के चेहरों की भी रौनक लौटी।

नैंगवा सहित उससे लगे गांव में स्थापित स्कूलों में किसी भी कंपनी का मोबाइल नेटवर्क नहीं मिलता है। इसके चलते अतिथि शिक्षकों की पुन: ज्वाइनिंग नहीं हो पा रही थी। भोपाल स्तर से समस्या का निराकरण कराया गया है। छात्रों की जितने दिन की पढ़ाई प्रभावित हुई है, उसके लिए अतिरिक्त कक्षाएं लगाकर कोर्स को पूरा कराने का सभी शिक्षक प्रयास करेंगे।

विपिन तिवारी, प्रभारी, शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला नैंगवा

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