26 साल बाद खत्म हुआ चर्चित भूमि विवाद, विधायक संजय पाठक की कंपनी की बाउंड्रीवाल पर चला बुलडोजर
जबलपुर में 26 साल पुराने चर्चित भूमि विवाद का अंत हो गया। प्रशासन ने न्यायालय के आदेश पर अतिक्रमण हटाकर विवादित जमीन का कब्जा विधिक वारिसों को सौंप दि...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 26 Jul 2026 10:37:24 AM (IST)Updated Date: Sun, 26 Jul 2026 10:37:24 AM (IST)
विधायक संजय पाठक को लगा झटका। (फाइल फोटो)HighLights
- 26 साल पुराने भूमि विवाद का आखिरकार हुआ समाधान।
- कोर्ट आदेश पर प्रशासन ने हटाया अवैध निर्माण पूरी तरह।
- विधायक संजय पाठक की कंपनी से जुड़ा था मामला।
नईदुनिया प्रतिनिधि, कटनी। जबलपुर के मदन मोहन चौबे वार्ड स्थित बहुचर्चित भूमि विवाद का आखिरकार 26 वर्ष बाद पटाक्षेप हो गया। जिला प्रशासन ने न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए शुक्रवार को पुलिस बल और नगर निगम के अतिक्रमण अमले की मौजूदगी में विवादित जमीन से बाउंड्रीवाल और निर्माण हटाकर उसका कब्जा विवेक चतुर्वेदी व अन्य विधिक वारिसों को सौंप दिया।
यह मामला विजयराघवगढ़ विधायक संजय पाठक की पारिवारिक कंपनी के नाम दर्ज भूमि से जुड़ा था। प्रशासन ने कार्रवाई के दौरान कंपनी की ओर से कराए गए निर्माण को भी ध्वस्त कर दिया।
किराये की जमीन से शुरू हुआ विवाद
- जानकारी के अनुसार, वर्षों पहले सरदार रघुवीर सिंह उर्फ बलवीर सिंह ने प्रकाश नाथ चतुर्वेदी से करीब 22 हजार वर्गफीट क्षेत्रफल की जमीन चीप टाल संचालन के लिए किराये पर ली थी। वर्ष 2001 में रघुवीर सिंह ने जमीन की खरीद का दावा करते हुए किराया देना बंद कर दिया और स्वयं को मालिक बताते हुए कब्जा बनाए रखा।
इसके बाद प्रकाश नाथ चतुर्वेदी ने आठ दिसंबर 2000 को जिला न्यायालय में निष्कासन वाद दायर किया, जिसके बाद मामला न्यायालय में विचाराधीन रहा। विधायक की पारिवारिक कंपनी को बेच दी जमीन
मामला न्यायालय में लंबित रहने के दौरान 31 मार्च 2013 को सरदार रघुवीर सिंह ने विवादित भूमि विजयराघवगढ़ विधायक संजय पाठक की पारिवारिक कंपनी मेसर्स अतिशा कंस्ट्रक्शन को बेच दी और कब्जा भी सौंप दिया। इसके बाद मौके पर बाउंड्रीवाल और दो कमरों का निर्माण कराया गया।
हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली राहत
- लंबी सुनवाई के बाद जिला न्यायालय ने रघुवीर सिंह के खिलाफ फैसला सुनाते हुए विवादित भूमि खाली करने और बकाया किराया अदा करने के आदेश दिए। इस बीच प्रकाश नाथ चतुर्वेदी का निधन हो गया, जिसके बाद उनके विधिक वारिस विवेक चतुर्वेदी व अन्य के पक्ष में कब्जा सौंपने के आदेश जारी हुए।
रघुवीर सिंह ने जिला न्यायालय के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन 26 अगस्त 2019 को हाई कोर्ट ने अपील खारिज कर दी। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां 21 सितंबर 2021 को भी याचिका निरस्त हो गई। इसके बावजूद वास्तविक कब्जा नहीं मिल सका और करीब पांच वर्षों तक कार्रवाई लंबित रही। प्रशासन ने हटाया कब्जा, वारिसों को सौंपी जमीन
शुक्रवार को जिला प्रशासन ने न्यायालय के आदेश का पालन कराते हुए जेसीबी मशीन की मदद से विवादित भूमि पर बनी बाउंड्रीवाल और दो कमरों को ध्वस्त कराया। कार्रवाई के बाद भूमि का कब्जा विवेक चतुर्वेदी व अन्य विधिक वारिसों को सौंप दिया गया। इसके साथ ही 26 वर्षों से चला आ रहा यह चर्चित भूमि विवाद समाप्त हो गया।
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