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MP के कटनी में है दो पहाड़ों से निर्मित अनूठी संरचना वाला प्रदेश का एकलौता डेम, फिर भी पर्यटन नक्शे से बाहर

अपनी अनूठी संरचना और ऐतिहासिक महत्व के बावजूद आज भी पर्यटन की मुख्यधारा से दूर है। अंग्रेजों के शासनकाल में लगभग 100 वर्ष पहले दो पहाड़ों को जोड़कर पत...और पढ़ें

By Mukesh TiwariEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Wed, 12 Aug 2026 02:39:36 PM (IST)Updated Date: Wed, 12 Aug 2026 02:39:36 PM (IST)
MP के कटनी में है दो पहाड़ों से निर्मित अनूठी संरचना वाला प्रदेश का एकलौता डेम, फिर भी पर्यटन नक्शे से बाहर
ऊमरडोली डेम की दीवारों से झरने की तरह गिरता वर्षा का पानी। सौजन्य 

HighLights

  1. सबसे बड़ी विशेषता इसकी सर्पाकार (आर्च) संरचना है
  2. वि‍ज्ञानी सोच और उत्कृष्ट इंजीनियरिंग का जीवंत प्रमाण
  3. तेज गति से आने वाले पानी का दबाव दीवारों पर नहीं पड़ता

नईदुनिया प्रतिनिधि,कटनी। जिले के रीठी विकासखंड अंतर्गत लालपुरा गांव के समीप स्थित ऊमरडोली जलाशय अपनी अनूठी संरचना और ऐतिहासिक महत्व के बावजूद आज भी पर्यटन की मुख्यधारा से दूर है। अंग्रेजों के शासनकाल में लगभग 100 वर्ष पहले दो पहाड़ों को जोड़कर पत्थरों से निर्मित यह सर्पाकार आर्च डेम प्रदेश में अपनी तरह का इकलौता उदाहरण माना जाता है।

दीवारों पर नहीं पड़ता, जिससे बांध की मजबूती बनी रहती

डेम की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सर्पाकार (आर्च) संरचना है। इस तकनीक के कारण तेज गति से आने वाले पानी का दबाव सीधे दीवारों पर नहीं पड़ता, जिससे बांध की मजबूती बनी रहती है। यह उस दौर की वि‍ज्ञानी सोच और उत्कृष्ट इंजीनियरिंग का जीवंत प्रमाण है।


पर्यटकों को दुर्गम पहाड़ी रास्तों का सहारा लेना पड़ता

बरसात के मौसम में ऊमरडोली जलाशय का प्राकृतिक सौंदर्य लोगों को आकर्षित करता है। हरियाली, पहाड़ों के बीच फैला जलाशय और ऐतिहासिक निर्माण इसे पर्यटन की दृष्टि से बेहद संभावनाशील बनाते हैं। बावजूद इसके, यहां तक पहुंचने के लिए आज भी पर्यटकों को दुर्गम पहाड़ी रास्तों का सहारा लेना पड़ता है।

पर्यटन के नक्शे पर स्थान दिलाने के दावे किए जाते रहे हैं

वर्षों से इस ऐतिहासिक धरोहर को पर्यटन के नक्शे पर स्थान दिलाने के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन अब तक न तो आवश्यक सुविधाएं विकसित हो सकीं और न ही पहुंच मार्ग का समुचित निर्माण हो पाया। परिणामस्वरूप प्रदेश की यह अनमोल विरासत आज भी पहचान और संरक्षण की प्रतीक्षा कर रही है।

पर्यटन विभाग को भेजा था प्रस्ताव

रीठी तहसील के बकलेहटा और चरगवां गांव के बीच पत्थरों से बने डेम में साल भार पानी रहता है। वर्षाकाल में ओवरफ्लो होकर दीवार से गिरता पानी इसको आकर्षक बनाता है तो सालभर लोग यहां पर घूमने व पिकनिक मनाने के लिए पहुंचते हैं। इंजीनियरिंग की बेजोड़ कलाकारी के नमूने को पर्यटन के मानचित्र में लाने का प्रयास किया गया लेकिन अभी तक उस दिशा में कोई सार्थक पहल नहीं हो पाई है।

सड़क निर्माण का प्रस्ताव आज तक अटका पड़ा है

पयर्टन विभाग को भी यहां पर शेड निर्माण, रेलिंग लगाने के साथ सड़क निर्माण कराने को लेकर प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन वह प्रस्ताव आज तक अटका पड़ा है। जिले के पूर्व कलेक्टर अवि प्रसाद ने भी यहां की खूबसूरती को देखकर जलाशय को पर्यटन में स्थान दिलाने की पहल की थी, लेकिन उनके तबादले के बाद जिला प्रशासन ने भी उसकी ओर ध्यान नहीं दिया। रीठी तहसील मुख्यालय से लगभग 20 किमी. की दूरी पर स्थित आर्च डेम तक जाने के लिए सुगम मार्ग नहीं है। जंगल के रास्ते से लोगों को लगभग तीन किमी. की दूरी तय करने के बाद पहुंचना होता है।

दस साल में हुआ था पत्थरों से तैयार

  • ऊमरडोली डेम जल संसाधन विभाग के आधीन है। बेजोड़ इंजीनियरिंग, दस साल की कड़ी मेहनत और पत्थरों को तराश कर इसके अंग्रेजी शासनकाल में तैयार कराया गया था।
  • इसे बनाने में 25.75 लाख क्यूबिक फीट पत्थरों का उपयोग किया गया है। रीठी तहसील के बकलेहटा और चरगवां गांव के बीच में दो पहाड़ों को जोड़कर बनाए गए जलाशय का निर्माण वर्ष 1914 में प्रारंभ हुआ था।
  • ऊमरडोली जलाशय का कैचमेंट एरिया 14.4 वर्ग मील है। पहाड़ों के पत्थरों को काटकर और तराशकर डेम को बनाने में दस साल का समय लगा।
  • 1520 फीट लंबे और 74 फीट ऊंचे जलाशय की कारीगरी और प्राकृतिक स्थल को देखने लोग पहुंचते हैं। आर्च डेम ऊमरडोली से लगा जंगल है, जो लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है।
  • वर्तमान में बनने वाले जलाशयों में जलभराव अधिक होने पर दीवारों के क्षतिग्रस्त होने की आशंका रहती है। ऊमरडोली डेम का निर्माण पुरानी तकनीक से कराया गया है।
  • दो पहाड़ों को जोड़ने बनाई गई दीवार सर्पाकार है। अधिकारियों के अनुसार जब तेज गति से जलभराव होता है तो सीधे दीवार से न टकराकर पानी फैल जाता है और इस कारण से दीवार पर सीधा जाेर नहीं पड़ता है।

सौ साल से अधिक समय से ऊमरडोली डेम मजबूती से टिका

पिछले सौ साल से अधिक समय से ऊमरडोली डेम मजबूती से टिका हुआ है और आज तक इसकी दीवारें क्षतिग्रस्त नहीं हुई हैं। जल संसाधन विभाग के जलाशय का उपयोग सिंचाई के लिए होता है। इससे निकलने वाली नहरों से चरगवां, बकलेहटा, बरजी सहित आधा दर्जन गांवों के किसानों की सिंचाई होती है। जलाशय की नहरों के माध्यम से 397 हेक्टेयर क्षेत्र की सिंचाई होती है।

ऊमरडोली डेम पुराविधायक, बहोरीबंद-रीठी विधानसभातन धरोहर की तरह है। उसे पर्यटन के रूप विकसित कराने की योजना पर कार्य किया जा रहा है और उसमें पर्यटन विभाग और स्थानीय स्तर पर व्यवस्थाएं कराने का कार्य किया जाएगा। डेम के पास शेड निर्माण, रेलिंग लगाने आदि का कार्य कराए जाने के साथ ही मार्ग को दुरूस्त कराने की योजना है। प्रस्ताव पास होते ही यहां पर कार्य कराए जाएंगे।

प्रणय पांडेय, क्षेत्रीय विधायक

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