कटनी में ट्रेन से उतारे गए मुस्लिम बच्चों को लेकर बड़ा सवाल, महाराष्ट्र और कर्नाटक के मदरसों में ऐसी कौन सी शिक्षा, जो बिहार के मदरसों में नहीं?
कटनी पुलिस ने अररिया बिहार से ट्रेन द्वारा महाराष्ट्र व कर्नाटक के मदरसों में ले जाए जा रहे 163 मुस्लिम बच्चों को संरक्षण में लिया है। ...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 19 Apr 2026 07:58:47 AM (IST)Updated Date: Sun, 19 Apr 2026 09:09:22 AM (IST)
HighLights
- आरोपी बोले हम भी वहीं पढ़े थे, इसलिए बच्चों को महाराष्ट्र-कर्नाटक ले जा रहे थे
- लातूर और नांदेड़ के मदरसों की जांच पूरी, फंड व दस्तावेजों की पड़ताल की गई
- सीडब्ल्यूसी को सौ बच्चों की सामाजिक जांच रिपोर्ट मिली, बिहार भेजने की तैयारी
नईदुनिया प्रतिनिधि, कटनी। बिहार के अररिया से महाराष्ट्र व कर्नाटक के मदरसों में ले जाए जा रहे जिन 163 मुस्लिम बच्चों को कटनी जिले की पुलिस ने अपने संरक्षण में लिया, उनको दी जाने वाली धार्मिक शिक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पुलिस और आईबी के अधिकारी इस सवाल का जवाब नहीं ढूंढ पा रहे हैं कि जब बिहार में ही हजारों मदरसे हैं तो फिर इतने बच्चों को हजार किलोमीटर से अधिक दूर कौन सी धार्मिक शिक्षा दिलाने के लिए ले जाया जा रहा था।
पुलिस ने मानव तस्करी के आरोप में जिन आठ लोगों पर एफआईआर दर्ज की है, उनसे भी पूछताछ में इस प्रश्न का उत्तर नहीं मिल पा रहा है। आरोपी यह कहकर चुप हो जा रहे हैं कि चूंकि वे भी महाराष्ट्र और कर्नाटक के इन मदरसों में पढ़े, इसलिए बच्चों को वहीं ले जा रहे थे।
ऐसे में सवाल यह है कि इन मदरसों में ऐसी कौन सी धार्मिक शिक्षा दी जा रही थी, जो बिहार के मदरसों में नहीं दी जाती। पुलिस अधिकारियों को भी आशंका है कि इस मामले में धार्मिक शिक्षा की गहरी जड़ों की परत खुल सकती है।
महाराष्ट्र के मदरसों की जांच पूरी
महाराष्ट्र के लातूर व नांदेड़ गई पुलिस की टीमें जांच कर वापस लौट आई हैं। हालांकि जांच के बाद अभी तक मानव तस्करी जैसी बात सामने नहीं आई है। मदरसों में फंड आदि कहां से आता है, इसको लेकर भी जीआरपी ने जांच की है। दोनों टीमों ने मदरसों में जानकारी जुटाने के साथ दस्तावेज देखे हैं, जिसमें आवासीय शिक्षा देने की व्यवस्था की जानकारी मिली है।