
नईदुनिया प्रतिनिधि, खंडवा : सरकारी दस्तावेजों में किसी जीवित व्यक्ति को मृत घोषित कर दिया जाए, तो उसकी जिंदगी कितनी मुश्किल हो सकती है, इसका उदाहरण शहर के चिराखदान निर्मलधाम बस्ती में देखने को मिल रहा है।
यहां रहने वालीं दृष्टिहीन वृद्धा शशिकला पत्नी पूनमचंद अपनी ही पहचान और जीवित होने का प्रमाण देने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगा रही हैं। उनकी समग्र आइडी डिलीट कर दी गई है और दस्तावेजों में मृत बता दिया गया है। इसके चलते पेंशन सहित शासकीय योजनाओं का लाभ भी बंद हो गया है।
वृद्धा दो बार जनसुनवाई में अपनी शिकायत दर्ज करा चुकी हैं, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ। मंगलवार को कांग्रेस पार्षद और नेता प्रतिपक्ष मुल्लू राठौर के साथ गले में तख्ती टांगकर वह कलेक्टोरेट पहुंचीं और अपनी पीड़ा बताई।
वृद्धा के अनुसार, नगर निगम में समग्र आईडी के संबंध में जानकारी लेने पर उसे मृत घोषित किए जाने की बात कही जाती है। वह कई बार निगम कार्यालय जाकर दस्तावेजों में सुधार की गुहार लगा चुकी है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
नेता प्रतिपक्ष मुल्लू राठौर ने वृद्धा की परेशानी सुनने के बाद कहा कि गरीब लोगों के साथ इस तरह का अन्याय ठीक नहीं है। स्थानीय रहवासियों का कहना है कि क्षेत्र में ऐसी पांच अन्य महिलाएं भी हैं, जो पात्र होने के बावजूद पेंशन से वंचित हैं।
गौरतलब है कि इससे पहले टैगोर पार्क क्षेत्र की एक महिला को भी सरकारी दस्तावेजों में मृत घोषित कर दिया गया था। नईदुनिया ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया था, जिसके बाद महिला के दस्तावेजों में सुधार हुआ था।
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