
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर से खंडवा के बीच बन रहे 216 किलोमीटर लंबे राजमार्ग का निर्माण कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है। सवा तीन साल बीत जाने के बाद भी तीनों सुरंगें अधूरी हैं। न सुरंगों के भीतर का काम पूरा हो पाया, न उन्हें जोड़ने वाली अप्रोच रोड तैयार हो सकी।
इस राजमार्ग को बनाने की मूल समय-सीमा मात्र दो साल थी और जनवरी 2025 में यह पूरा हो जाना था, लेकिन प्रोजेक्ट पहले ही सवा साल पिछड़ चुका है। अब भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अधिकारियों का कहना है कि जनवरी 2027 से वाहन इस मार्ग पर गुजर सकेंगे।
इन दिनों सुरंगों के भीतर वाटरप्रूफ मेम्ब्रेन (डब्ल्यूपीएम) की परत चढ़ाई जा रही है, ताकि बरसात का पानी अंदर न आ सके। डब्ल्यूपीएम के बाद सरियों का जाल बिछाकर सीमेंटीकरण किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार 50 से 60 मीटर के हिस्से का काम पूरा करने में ही एक महीने का समय लग रहा है। छह लेन की इन सुरंगों की चौड़ाई 16 मीटर और ऊंचाई नौ मीटर है। इसके अलावा तेजाजी नगर से सिमरोल के बीच बन रहे फ्लाईओवर को भी पूरा होने में अभी और समय लगेगा।
हाल ही में एनएचएआई के रीजनल आफिसर श्रवण कुमार सिंह, प्रोजेक्ट डायरेक्टर प्रवीण यादव और मेघा इंजीनियरिंग के प्रोजेक्ट मैनेजर नागेश्वर राव सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने भेरूघाट का स्थलीय निरीक्षण किया। अधिकारियों ने दावा किया कि भेरूघाट टनल से जुलाई तक यातायात शुरू कर दिया जाएगा।
इंदौर-खंडवा राजमार्ग बनने के बाद सफर और आसान होगा। वर्तमान में जहां ओंकारेश्वर पहुंचने में ढाई घंटे लगते हैं। बाद में यह सफर महज सवा घंटे में किया जा सकेगा, क्योंकि दस किलोमीटर का रास्ता कम होगा। वाय डक्ट बनने के बाद पूरी तरह से घाट सेक्शन खत्म हो जाएगा। दो वायडक्ट और चोरल नदी पर तीन ब्रिज बनेंगे। अधिकारियों के मुताबिक ओंकारेश्वर के अलावा खंडवा भी ढाई घंटे में पहुंचा जाएगा।
इंदौर-खंडवा राजमार्ग बनने के बाद इच्छापुर से हैदराबाद की कनेक्टिविटी मिलेगी। इंदौर-बलवाड़ा सेक्शन में तीन सुरंग और अप्रोच रोड अगले कुछ महीनों में पूरा किया जाएगा। इसके अलावा राजमार्ग बनने से दो वाय डक्ट और आरओबी को दिसंबर तक काम खत्म करेंगे। घाट सेक्शन खत्म होने से ट्रैवल टाइम कम होगा। श्रवण कुमार सिंह, रीजनल आफिसर, एनएचएआइ
राजमार्ग पूरा होने के बाद इंदौर से ओंकारेश्वर महज डेढ़ घंटे और खंडवा ढाई घंटे में पहुंचा जा सकेगा। फिलहाल यही सफर तीन से चार घंटे में तय होता है। लेकिन यह सुविधा कब मिलेगी। यह अब डेडलाइन नहीं, जमीन पर काम की रफ्तार तय करेगी।