
नईदुनिया प्रतिनिधि, खरगोन। मध्य प्रदेश में एक ही व्यक्ति के नाम पर तीन जिलों में संविदा चिकित्सक की नियुक्ति का मामला अब और उलझ गया है। अब इस प्रकरण में नया मोड़ तब आया, जब खुद को वास्तविक डॉ. महेश चंद शर्मा बताने वाले एक एमबीबीएस चिकित्सक ने शहडोल के जयसिंहनगर थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके चाचा सतीश शर्मा ने उनके नाम और शैक्षणिक दस्तावेजों का कथित दुरुपयोग कर प्रदेश के तीन जिलों में संविदा चिकित्सा अधिकारी की नौकरी हासिल की और वर्षों तक शासन से मानदेय भी लेते रहे।
शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि उन्होंने वर्ष 2019 में भोपाल के पीपल्स मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस किया और वर्तमान में राजस्थान के डीग जिले के पूंछरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत हैं। कुछ दिन पहले उन्हें जानकारी मिली कि उनके नाम और दस्तावेजों का उपयोग कर प्रदेश में कोई व्यक्ति डॉक्टर के रूप में कार्य कर रहा है। इसके बाद उन्होंने पुलिस से कार्रवाई की मांग की।
मामला तीन जुलाई को सामने आया, जब रीवा लोकायुक्त ने शहडोल जिले के ऊफरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ संविदा चिकित्सक डॉ. महेश चंद शर्मा को कथित रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। इसके बाद राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) ने दस्तावेजों की जांच शुरू की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच में पता चला कि इसी नाम का चिकित्सक एक जून 2021 से श्योपुर जिले के सहसराम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी पदस्थ है। वहीं फरवरी 2023 से खरगोन जिले के केली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी इसी नाम से संविदा चिकित्सक की नियुक्ति हुई थी। इससे एक ही नाम पर तीन जिलों में नौकरी किए जाने का मामला उजागर हुआ।
एनएचएम की प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि आरोपित ने अलग-अलग जिलों में नियुक्ति के लिए अपने तथा अपने पिता के नाम में मामूली बदलाव कर अलग-अलग दस्तावेज और तीन पैन कार्ड का उपयोग किया। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर संविदा नियुक्तियां हासिल करने का संदेह है। खरगोन जिले से संबंधित रिकॉर्ड भी राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन को भेजे जा चुके हैं।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की शिकायत पर भोपाल के चुनाभट्टी थाने में आरोपित के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में प्रकरण दर्ज किया जा चुका है। एफआइआर में आरोप है कि फर्जी पहचान और दस्तावेजों के आधार पर तीन जिलों में संविदा चिकित्सक की नियुक्ति लेकर शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया।
शहडोल के जयसिंहनगर थाना प्रभारी अजय बैगा ने बताया कि दो जिलों के दस्तावेज पुलिस को मिल चुके हैं। शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत एमबीबीएस डिग्री और अन्य प्रमाण-पत्रों का सत्यापन कराया जा रहा है। तीसरे जिले का रिकॉर्ड मिलने के बाद पूरे मामले की वैधानिक जांच आगे बढ़ाई जाएगी। पुलिस यह भी पता लगाएगी कि नियुक्ति प्रक्रिया में किन स्तरों पर लापरवाही हुई और कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर तीन जिलों में नियुक्ति कैसे संभव हुई।