
नईदुनिया प्रतिनिधि, मंदसौर। जिला चिकित्सालय के ब्लड बैंक से मिलने वाली प्रोत्साहन राशि को फिर से वसूलने के आदेश सिविल सर्जन ने जारी किए है। उन्होंने आदेश में बैंक अकाउंट के नंबर भी जारी किए हैं, जिसमें यह राशि जमा होनी है। इसमें 35 चिकित्सक सहित 61 स्वास्थ्यकर्मियों के नाम शामिल हैं।
12 प्रश ब्याज सहित सभी 49 लाख 18 हजार 536 रुपये की वसूली होना है। सबसे ज्यादा 14.04 लाख की रिकवरी तो यहां पूर्व में पदस्थ रहे सिविल सर्जन डॉ. डीके शर्मा के पुत्र डॉ. सौरभ शर्मा पर ही निकली है। बताया जा रहा है डा. शर्मा के कार्यकाल में ही राज्य शासन के आदेश की गलत व्याख्या होने से इन सभी सेलरी के बजाय इंसेटिव देना शुरु किया गया था।
लगभग सात सालों तक ब्लड बैंक प्रोत्साहन योजना के तहत 35 चिकित्सकों सहित 61 स्वास्थ्यकर्मियों को 43 लाख 91 हजार 550 रुपये दिए गए है। अब यह राशि वसूली के आदेश निकले हैं तो इनमें 12 प्रश ब्याज 5 लाख 26 हजार 986 रुपये जोड़कर कुल 49 लाख 18 हजार 536 रुपये की वसूली निकाली गई है।
सिविल सर्जन डॉ. बीएल रावत द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी मंदसौर द्वारा 21 अप्रैल को पत्र भेजकर निर्देशित किया था कि जिन चिकित्सकों एवं कर्मचारियों द्वारा ब्लड बैंक प्रोत्साहन राशि प्राप्त की गई है उनसे ब्याज सहित रुपये वसूलना है।
मप्र शासन के नियमानुसार वसूली पर 12 प्रश ब्याज की गणना कर वसूली होना चाहिए। इसलिए मूल राशि में 12 प्रश ब्याज की गणना कर वसूली करने के आदेश प्रसारित किए गए है। संबंधित सीधे रोगी कल्याण समिति के एक्सिस बैंक खाते में जमा कर सकते हैं। या जिला चिकित्सालय में महेंद्रसिंह चौहान, सहायक ग्रेड 3 को जमा कराकर रसीद प्राप्त कर सकते हैं।
यहां पदस्थ रहे पूर्व सिविल सर्जन डा. डीके शर्मा ने अपने कार्यकाल में ही पुत्र डा. सौरभ शर्मा को ब्लड बैंक का प्रभारी बनाया था। वह आज भी ब्लड बैंक प्रभारी है। शर्मा के कार्यकाल में ब्लड बैंक प्रभारी बनाए गए पुत्र डा. सौरभ शर्मा को सबसे ज्यादा 12 लाख 53 हजार 700 रुपये की प्रोत्साहन राशि मिली थी। जो अब 12 प्रश ब्याज 1 लाख 50 हजार 444 रुपये मिलाकर कुल 14 लाख 4 हजार 144 रुपये चुकाना है। इसके बाद पैथालाजिस्ट डा. सौरभ मंडवारिया को 9 लाख 66 हजार 560 रुपये चुकाना है। हालांकि अस्पताल प्रबंधन अभी भी गलत तरीके से प्रोत्साहन राशि लेने वाले चिकित्सकों व स्वास्थ्यकर्मियों से राशि वसूलने में केवल कागज-कागज ही खेल रहा है। जबकि उनके वेतन से भी कटौती की जा सकती है।
सिविल सर्जन डॉ. बीएल रावत ने बताया कि ब्लड बैंक प्रोत्साहन राशि के गलत आवंटन की शिकायत के बाद सीएमएचओ कार्यालय से जांच की गई थी। उसके बाद ही अब वसूली के आदेश निकाले गए हैं। अभी भी तक किसी ने राशि जमा नहीं कराई है। अधिकांश लोग जिला चिकित्सालय में ही कार्यरत है। जांच में यह पाया गया कि जो राशि वेतन के रुप में दी जाना थी वह इंसेटिव में बदल दिया गया। राज्य शासन का आदेश अलग था और उसकी व्याख्या कुछ गलत की गई है। पूर्व सिविल सर्जन के कार्यकाल में कलेक्टर से आदेश कराकर यह कार्य किया गया था। जनवरी 25 में गड़बड़ी सामने आने के बाद इसे बंद किया गया था।
