
आलोक शर्मा, नईदुनिया, मंदसौर : दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे पर लगातार हो रहे हादसे ने अब अधिकारियों की नींद उड़ा दी है। अभी मध्यप्रदेश के लगभग 240 किमी हिस्से में यातायात प्रारंभ हुए अभी तीन साल हो चुके हैं और इस दौरान लगभग 1500 से ज्यादा हादसों में 80 लोगों की मौत हो चुकी है।
कई दुर्घटना की जांच में यह पाया गया कि चालक को नींद की झपकी लगने से यह हादसा हुआ है। अब नेशनल हाईवे अथारिटी आफ इंडिया के अधिकारी निगरानी व्यवस्था को इस तरह करने के प्रयास में हैं कि वाहनों की रफ्तार पर नजर रखने के साथ ही चालक को झपकी लगे या नींद आए तो उसे अलर्ट करने की योजना भी बनाई जा रही है। इसलिए उपलब्ध तकनीकी संसाधनों का पूरा उपयोग किया जाएगा।
दिल्लील-मुंबई एक्सप्रेस वे पर अभी कैमरे, रडार, पेट्रोलिंग वाहन और दूसरी सुरक्षा व्यवस्थाएं मौजूद है। इसके बावजूद हादसों का सिलसिला जारी है। ऐसे में सिर्फ घटना की निगरानी करने के बजाय वाहन की गति और चालक के व्यवहार की लगातार मानिटरिंग करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
इसके साथ ही एनएचएआई एक्सप्रेस-वे पर लगे कैमरों का एक्सेस भी संबंधित पुलिस थाने को देने की तैयारी कर रहा है। अभी इन कैमरों से मिलने वाली जानकारी सीधे पुलिस की कार्रवाई से नहीं जुड़ी है। एक्सेस मिलने के बाद कैमरों से वाहनों की गति रिकार्ड की जा सकेगी। तय गति से ज्यादा चलाने वाले वाहनों पर ऑनलाइन चालान की कार्रवाई की जा सकेगी। इस व्यवस्था का मकसद यह है कि तेज गति के मामले में पुलिस को मौके पर वाहन रोकने का इंतजार नहीं करना पड़े। कैमरे वाहन की गति और नंबर प्लेट रिकार्ड करेंगे और इसी आधार पर कार्रवाई होगी।
एक्सप्रेस-वे की डिजाइन ही ऐसी है कि लंबी दूरी तक सड़क सीधी और अपेक्षाकृत खाली रहती है। यही सुविधा कई बार ड्राइवर के लिए जोखिम बन जाती है। लगातार एक जैसी सड़क पर लंबे समय तक वाहन चलाने से थकान और नींद की स्थिति बन सकती है।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और निर्माण एजेंसी अब ऐसे सिस्टम पर भी काम कर रहे हैं जिससे चालक को नींद आने या उसकी सतर्कता कम होने पर अलर्ट कर सके। एक्सप्रेस-वे पर वाहनों के लिए अलग-अलग लेन निर्धारित हैं।
कार के लिए अधिकतम 120, बस के लिए 100 और ट्रक के लिए 80 किलोमीटर प्रति घंटे की गति सीमा है। समस्या तब बढ़ रही है जब तेज रफ्तार वाहन चालक अचानक लेन बदलते हैं या गलत तरीके से ओवर टेक करते हैं। एनएचएआई के सामने चुनौती सिर्फ ओवर स्पीड रोकने की नहीं हैं बल्कि गलत लेन में चलने और अचानक लेन बदलने वाले वाहनों की पहचान करने की भी है। इसी वजह से निगरानी सिस्टम को ज्यादा सक्रिय बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
एनएचएआई अधिकारियों का दावा है कि हादसों से निपटने के लिए एक्सप्रेस-वे पर 25 एंबुलेंस, 27 क्रेन और 27 रुट पेट्रोल वाहन तैनात है। निगरानी के लिए 901 पीटीजेड कैमरे, 810 एएनपीआर कैमरे और 160 रडार लगाए गए है। इसके अलावा 150 एक्टिव स्पीड डिस्प्ले, 262 वीडियो घटना पहचान प्रणाली और 82 परिवर्तनीय संदेश संकेत भी लगाए गए हैं।
अब इन संसाधनों का इस्तेमाल केवल हादसा होने के बाद प्रतिक्रिया देने के लिए नहीं बल्कि हादसे की आशंका पहले पहचानकर वाहन चालक पर तत्काल कार्रवाई करने के लिए तैयारी की जा रही है। तीन साल में मध्यप्रदेश के करीब 240 किलोमीटर हिस्से में हुए लगभग 1500 से ज्यादा हादसों में करीब 80 लोगों की मौत हुई है जबकि हजार से अधिक लोग घायल हुए। पूरे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर इसी अवधि में करीब 400 लोगों की जान गई है। हादसों के पीछे ओवर स्पीड, गलत लेन और ड्राइवर को नींद आने जैसे कारण मुख्य है।
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे के मप्र वाले हिस्से में दुर्घटनाएं रोकने के लिए कंस्लटेंट को प्लान बनाने को कहा है। इनमें ओवर स्पीड के चालान से लेकर नींद आने की स्थिति में चालक को अलर्ट भेजने तक की योजना शामिल है। अभी एक्सप्रेस वे चालू होने के बाद से यहां लगभग 1500 दुर्घटनाएं हो चुकी है। इन्हे शून्य करना हमारा लक्ष्य है। -देंवेंद्र चापेकर, प्रोजेक्ट डायरेक्टदर, एनएचएआई, रतलाम
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