मुरैना: हेचरी में पले कछुए अब चंबल की गोद में, वन विभाग ने छोड़े 83 कछुए
राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में कुल चार अस्थाई कछुआ हेचरी हैं। ...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 14 May 2026 12:48:48 PM (IST)Updated Date: Thu, 14 May 2026 12:49:38 PM (IST)
चंबल नदी के घाट पर कछुओं को छोड़ती वन विभाग की टीम। वीडियो ग्रैबHighLights
- अंडों की सुरक्षा से लेकर नदी तक का सफर
- 7 हजार से ज्यादा कछुओं को मिला प्राकृतिक आवास
- बरोली से सांकरी घाट तक कछुओं का बसेरा
नईदुनिया प्रतनिधि, ग्वालियर। मुरैना और भिंड वन विभाग की टीम ने गुरुवार को चंबल नदी में 83 कछुओं को छोड़ा। यह कछुए मुरैना के उसैद घाट पर बनाई गई अस्थायी हेचरी में पाले गए थे।
गुरुवार की सुबह चंबल घड़ियाल सेंक्चुरी के मुरैना डीएफओ हरीश बघेल और भिंड के अधीक्षक श्याम सिंह चौहान ने इन कछुओं को चंबल नदी के घाट पर छोड़ा तो दौड़ लगाते हुए कछुए पानी की ओर दौड़े और पलक झपकने जितने समय में गहरे पानी में खो गए। बता दें, कि चंबल नदी के टापुओं से कछुओं के अंडों को इकट्ठा करके अस्थायी हेचरी में इनका जन्म करवाया जाता है और यहीं पाला जाता है।
राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में कुल चार अस्थाई कछुआ हेचरी हैं, जिनमें बरोली घाट, बटेशवरा घाट, उसैद घाट एवं सांकरी घाट पर बनी हैं। इन चारों हेचरी सें 7344 कछुए हेंच हुए जिनको प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया हैं। कुछ नेस्ट में अभी हेचिंग होना शेष हैं।