रेत माफिया को रोकने चंबल के घाटों पर बंदूकों के साथ तैनात होंगे 102 वनकर्मी, सुप्रीम कोर्ट तक जाएगी रिपोर्ट
Chambal River Sand Excavation Control: अभी तक चंबल के घाटों पर एसएएफ का सशस्त्र बल तैनात था, जो स्थायी नहीं रहता। इसके अलावा चंबल के हर घाट की निगरानी...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 13 Aug 2026 10:56:18 AM (IST)Updated Date: Thu, 13 Aug 2026 10:58:20 AM (IST)
चंबल के राजघाट पर ड्रोन से निगरानी करते प्रशासन की संयुक्त टीम। नईदुनियाHighLights
- चंबल अभ्यारण्य में बनेंगी 16 सशस्त्र चौकियां
- तीन स्तरीय टीमों से घाटों की 360 डिग्री निगरानी
- सख्ती के बीच धौलपुर रोड पर सज रही रेत मंडी
नईदुनिया प्रतिनिधि, मुरैना। सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों के बाद चंबल नदी से होने वाले रेत के अवैध उत्खनन को रोकने के लिए वन विभाग अपने 102 वनरक्षकों के कंधे पर बंदूकें टांग रहा है। यह सशस्त्र वनरक्षक अगले माह से चंबल के घाटों से लेकर अवैध रेत के परिवहन वाले मार्गो पर तैनात होंगे। अभी तक चंबल के घाटों पर एसएएफ का सशस्त्र बल तैनात था, जो स्थायी नहीं रहता। इसके अलावा चंबल के हर घाट की निगरानी करने के लिए त्रिस्तरीय निगरानी टीम बनाई है, जिसकी रिपोर्ट हर माह सुप्रीम कोर्ट को भेजी जाएगी।
राजघाट पर तंबू लगाकर दिन-रात पहरा दे रहे हैं जवान
चंबल नदी के राजघाट, बरवासिन घाट व हाईवे पर एसएएफ के 130 कर्मचारी अभी तैनात हैं, इनमें से दर्जनों जवान चंबल के राजघाट पर तंबू लगाकर दिन-रात पहरा दे रहे हैं। इस निगरानी को और कड़ा करने के लिए वन विभाग ने शासन ने 120 से अधिक वनरक्षक व बंदूकों की मांग की थी। चंबल घड़ियाल अभ्यारण्य मुरैना के डीएफओ हरीशचंद्र बघेल ने बताया कि 34 नए वनरक्षक मुरैना को मिल चुके हैं।
मुरैना में वन विभाग के पास पहले से 67 बंदूकें थीं, शासन ने अन्य जिलों से 35 बंदूकें और चंबल घड़ियाल अभ्यारण्य को दी हैं। चंबल घड़ियाल अभ्यारण्य प्रशासन द्वारा 16 चौकियां खोली जा रही हैं, जिनमें 10 मुरैना में, चार श्योपुर में और दो भिंड जिले में होंगी। यहां भी सशस्त्र बल तैनात होगा, जिससे हथियारों की दम पर जब्त किए गए अवैध रेत के वाहन छीनकर ले जाने की घटनाएं आम बात थी, जिन पर अब अंकुश लगेगा।
धौलपुर रोड, काका ढाबा के पास अवैध रेत से भरे ट्रैक्टर-ट्रालियां इस तरह कतार में खड़े हो रहे, लेकिन इधर किसी की नजर नहीं जाती। नईदुनिया
डीएफओ ऑफिस के पास ही अवैध रेत की मंडी
निगरानी के दावों के साथ प्रशासन का तर्क है, कि रेत उत्खनन व परिवहन पूरी तरह बंद है। लेकिन हकीकत यह है, कि जिला मुख्यालय पर हर रोज सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्राली चंबल का रेत लेकर आ रहे हैं। बीते दो दिन से डीएफओ आफिस से चंद कदम दूर, धौलपुर रोड पर काका ढाबा के पास से लेकर ओवरब्रिज पुल के छोर तक चंबल नदी से भरे रेत के ट्रैक्टर-ट्रालियों की मंडी लग रही है। चंबल के रेत पर पाबंदी लगने का फायदा भी रेत माफिया जमकर उठा रहे हैं, जो ट्राली पहले 2000-2200 रुपये की थी, वह 5000 रुपये में बेची जा रही है।
कलेक्टर से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक जाएगी रिपोर्ट
चंबल नदी के लगभग 30 ऐसे घाट हैं, जहां से रेत का अवैध उत्खनन होता है। इसे रोकने के लिए तीन स्तर पर टीमें बनी हैं। पहली टीम मुरैना, सबलगढ़, अंबाह और जौरा अनुभाग में बनी हैं। जहां राजस्व, पुलिस, खनिज व वन विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी-कर्मचारी हफ्ते में दो बार अपने-अपने क्षेत्र के हर घाट का निरीक्षण कर जीपीएस लोकेशन के फोटो 360 डिग्री एंगल के वीडियो बनाएंगे। यह रिपोर्ट हफ्ते में दो बार एसडीएम के पास आएगी। एसडीएम महीने में दो बार अपनी रिपोर्ट जिला स्तर की टीम को देंगे और बताएंगे कि किस घाट पर अवैध उत्खनन की क्या स्थिति है। तीसरे स्तर पर कलेक्टर, एसपी, डीएफओ, जिला खनिज अधिकारी की टीम की एक रिपोर्ट बनेगी, जो हर महीने शासन के जरिए सुप्रीम कोर्ट भेजकर चंबल नदी से अवैध रेत के उत्खनन की वस्तुस्थिति बताई जाएगी।
चंबल नदी से रेत का अवैध उत्खनन पूरी तरह रुका है, यह कार्रवाई प्रभावी तौर से जारी रहे, इसीलिए 102 वनकर्मियों को बंदूकों के साथ चंबल के घाट व रेत परिवहन वाले रास्तों पर तैनात किया जाएगा। मुरैना, श्योपुर व भिंड में 16 चेकपोस्ट बनाई गई हैं। यह सभी सितंबर महीने से प्रभावी हो जाएंगे। निगरानी के लिए ब्लाक के लेकर जिला स्तर पर टीमें हैं, जिनकी रिपोर्ट हर महीने शासन व सुप्रीम कोर्ट को भेजी जाएगी। - हरीशचंद्र बघेल डीएफओ, चंबल घड़ियाल अभयारण्य मुरैना।