
नईदुनिया प्रतिनिधि, नरसिंहपुर। पुलिस की खाकी वर्दी को अक्सर कठोरता का प्रतीक माना जाता है, लेकिन जब इसी वर्दी के पीछे एक संवेदनशील और ममतामयी हृदय धड़कता है, तो वह 'देवदूत' की भूमिका निभाने लगती है। कुछ ऐसा ही नजारा नरसिंहपुर जिले में देखने को मिला।
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर का एक युवक अपनी सुध-बुध खोकर भटकते हुए सात समंदर पार सऊदी अरब से यहां आ पहुंचा। यहां कोतवाली नरसिंहपुर में पदस्थ आरक्षक पंकज राजपूत की आत्मीयता ने इस भटकते शख्स को न केवल सहारा दिया, बल्कि बिछड़े परिवार से मिलवाकर इंसानियत की एक नई इबारत लिख दी।

कहानी की शुरुआत 24 अप्रैल 2026 को रियाद एयरपोर्ट से होती है, जहां 44 वर्षीय उनसाद पिता समीउल्लाह मियां को उनकी बिगड़ती मानसिक स्थिति के कारण भारत रवाना किया गया था।
वे सऊदी अरब में बतौर ड्राइवर काम करते थे। वे मुंबई एयरपोर्ट पर उतरे तो सही, लेकिन अपने घर गोरखपुर का रास्ता भूल गए। यादों के कोहरे में घिरे उनसाद भटकते-भटकते ट्रेन से भुसावल के रास्ते मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले की गलियों में पहुंच गए। कई दिनों तक वे फटेहाल और बेहाल अवस्था में यहां घूमते रहे, किसी को अंदाजा भी नहीं था कि इस बेसहारा दिख रहे व्यक्ति का कोई अपना उन्हें मीलों दूर बेसब्री से तलाश रहा होगा।
आरक्षक की पड़ी नजर तो की पूछताछ
5 मई का वह दिन उनसाद के लिए नई उम्मीद लेकर आया जब कोतवाली नरसिंहपुर में तैनात आरक्षक पंकज राजपूत की नजर उन पर पड़ी। उनकी दयनीय हालत और आँखों में छिपे खालीपन को देख पंकज ने उनसे बातचीत की कोशिश की।
शुरुआत में संवाद कठिन था, क्योंकि उनसाद अपनी पहचान और ठिकाना लगभग भूल चुके थे। लेकिन आरक्षक ने हार नहीं मानी और एक परिजन की तरह उनकी देखभाल शुरू की।
उन्हें भोजन कराया गया, नए कपड़े दिए गए और सबसे महत्वपूर्ण उन्हें 'अपनापन' दिया गया। इसी अपनेपन की आंच ने उनसाद की धुंधली यादों को थोड़ा साफ किया।
आरक्षक पंकज ने जब उस नंबर पर कॉल किया, तो दूसरी तरफ हताशा में डूबे परिवार के लिए यह किसी ईश्वरीय संदेश से कम नहीं था। 9 मई को जब उनसाद के बड़े भाई जैश मोहम्मद और भतीजे नरसिंहपुर पहुंचे, तो मिलन का वह दृश्य पत्थर दिल को भी पिघला देने वाला था।
अपने भाई को सुरक्षित पाकर परिजनों की आंखें छलक आईं, वहीं अपनों का स्पर्श पाकर उनसाद के चेहरे पर भी सुकून की लहर दौड़ गई। पुलिस की इस संवेदनशीलता ने न केवल एक परिवार को बिखरने से बचाया।
समाज में खाकी के प्रति विश्वास को और गहरा कर दिया। अंतत: पुलिस ने उसे परिवार के सािा ट्रेन से उनके गृह नगर रवाना किया गया। स्टेशन पर विदाई के वक्त माहौल भावुक था।
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