भाई के लिए 'झांसी की रानी' बनी 8 साल की बहन... 3 मिनट तक कुत्ते से लड़ी, ऐसे बचाई जान
अपने पांच वर्षीय भाई को कुत्ते से बचाने के लिए 8 वर्ष की बहन ने जान की बाजी लगा दी। बहन ने तीन से पांच मिनट तक संघर्ष करते हुए अपने छोटे भाई को मौत के ...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 04 Jan 2026 09:22:50 PM (IST)Updated Date: Sun, 04 Jan 2026 09:22:50 PM (IST)
भाई के लिए 'झांसी की रानी' बनी 8 साल की बहननईदुनिया प्रतिनिधि, राजगढ़। अपने पांच वर्षीय भाई को कुत्ते से बचाने के लिए 8 वर्ष की बहन ने जान की बाजी लगा दी। बहन ने तीन से पांच मिनट तक संघर्ष करते हुए अपने छोटे भाई को मौत के मुंह से वापस खींच लिया। आवारा कुत्ते के इस हमले में भाई घायल हो गया है। घटना खिलचीपुर शहर के सोमवारिया क्षेत्र की है, जहाँ मजदूर सुरेश राव के बच्चे क्रिश (5 वर्ष) और उसकी बहन लीजा (8 वर्ष) रविवार सुबह अपनी बुआ के घर के बाहर खेल रहे थे।
3 से 5 मिनट तक चला मौत से संघर्ष, टीशर्ट से रोका खून
इसी दौरान एक आवारा कुत्ता आया और उसने 5 वर्षीय क्रिश पर हमला कर दिया। कुत्ते ने बच्चे के सिर को नोच दिया, जिससे खून बहने लगा और बच्चा दर्द के कारण चिल्लाने लगा। भाई को खतरे में देख लीजा बिना डरे कुत्ते से भिड़ गई। वह करीब 3 से 5 मिनट तक संघर्ष करती रही, जिस दौरान कुत्ते ने लीजा को भी चोटिल कर दिया। चीख-पुकार सुनकर जब लोग जमा हुए तो कुत्ता भाग निकला। लीजा ने गजब की सूझबूझ दिखाते हुए अपनी टीशर्ट उतारकर भाई के सिर पर बांध दी, ताकि खून का बहाव रुक सके।
अस्पताल में भर्ती... राजगढ़ जिला चिकित्सालय किया गया रेफर
घटना के बाद आसपास के लोगों ने माता-पिता को जानकारी दी। मां पूनम राव मौके पर पहुंचीं और मजदूरी पर गए पिता सुरेश राव को बुलाया गया। दोनों बच्चों को खिलचीपुर अस्पताल ले जाया गया, जहाँ प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें राजगढ़ जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। चिकित्सकों के अनुसार, क्रिश के सिर में गहरा घाव है और लीजा के शरीर पर भी चोट के निशान हैं। फिलहाल दोनों का इलाज जारी है।
जिले में आवारा कुत्तों का आतंक... लगातार बढ़ रहे हमले
राजगढ़ जिले में कुत्तों के काटने के केस लगातार सामने आ रहे हैं। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आए दिन आवारा कुत्ते नागरिकों और बच्चों को शिकार बना रहे हैं। दो दिन पहले ही नरसिंहगढ़ में कुत्तों ने कई लोगों पर हमला किया था। राजगढ़ शहर और ग्रामीण अंचलों में यह अब आम बात हो गई है। आए दिन इंजेक्शन लगवाने और उपचार के लिए पीड़ित लोग सिविल अस्पतालों और जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं।