
नईदुनिया प्रतिनिधि, राजगढ़/ ब्यावरा।आस्था, साहस और सहनशक्ति की एक अनोखी मिसाल मध्य प्रदेश के गुना जिले की 70 वर्षीय भूरीबाई ने पेश की। मथुरा-वृंदावन की 84 कोसी परिक्रमा के दौरान फायरिंग में पैर में गोली लगने के बावजूद उन्होंने न केवल अपनी धार्मिक यात्रा जारी रखी, बल्कि पूरी परिक्रमा समाप्त करने के बाद ही उपचार कराया।
गुना जिले के बीनागंज क्षेत्र के ग्राम खतौली निवासी भूरीबाई लोधा 27 मई को करीब 20 श्रद्धालुओं के दल के साथ 84 कोसी परिक्रमा के लिए रवाना हुई थीं। परिक्रमा के दौरान मथुरा के पास माहोली गांव में आयोजित एक भंडारे के समय दो पक्षों के बीच विवाद हो गया। देखते ही देखते विवाद हिंसक झड़प में बदल गया और फायरिंग शुरू हो गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उसी दौरान श्रद्धालुओं का जत्था वहां से गुजर रहा था। अचानक चली एक गोली भूरीबाई के पैर में आ लगी। गोली लगने से वह घायल हो गईं और पैर से खून बहने लगा। मौके पर प्राथमिक उपचार तो मिला, लेकिन गोली पैर के भीतर ही फंसी रह गई और किसी को इसकी जानकारी नहीं हो सकी।
हैरानी की बात यह है कि घायल होने के बावजूद भूरीबाई ने अपनी धार्मिक यात्रा बीच में नहीं छोड़ी। लगातार दर्द सहते हुए उन्होंने पूरी 84 कोसी परिक्रमा पूरी की और 8 जून को अपने गांव लौट आईं।
गांव लौटने के बाद भी पैर का दर्द कम नहीं हुआ। जब तकलीफ बढ़ने लगी तो परिजन उन्हें 11 जून को ब्यावरा के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां एक्स-रे जांच में डॉक्टरों को पैर के भीतर फंसी गोली दिखाई दी। इसके बाद चिकित्सकों ने ऑपरेशन कर गोली बाहर निकाल दी।
घटना की जानकारी मिलने पर सिटी थाना पुलिस अस्पताल पहुंची और मेडिकल लीगल केस (एमएलसी) दर्ज किया। महिला के दामाद ऊधम सिंह ने बताया कि गोली लगने के बाद भी उनकी सास करीब 15 दिनों तक दर्द सहती रहीं और परिक्रमा पूरी करने के बाद ही इलाज कराया।
परिजनों का आरोप है कि माहोली गांव में करीब आधे घंटे तक दोनों पक्षों के बीच फायरिंग होती रही, जिससे श्रद्धालुओं में अफरा-तफरी मच गई थी। उनका कहना है कि घायल होने के बावजूद तत्काल प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार घटना उत्तर प्रदेश के मथुरा क्षेत्र में हुई थी। इसलिए मेडिकल रिपोर्ट और अन्य दस्तावेज संबंधित थाना क्षेत्र की पुलिस को भेजे जा रहे हैं, ताकि आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सके।