खेतों में पड़ी दरारें, आसमान पर टिकीं निगाहें; इंद्रदेव को प्रसन्न करने गांव के बाहर सामूहिक भोजन बना रहे राजगढ़ के किसान
अच्छी बारिश की कामना के लिए गांव-गांव में किसान 'उज्जैनी' जैसी पारंपरिक धार्मिक रस्में निभा रहे हैं। मंदिरों में भजन-पूजन और सामूहिक प्रार्थना का आयोज...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 20 Jul 2026 02:12:16 PM (IST)Updated Date: Mon, 20 Jul 2026 02:12:16 PM (IST)
मलावर में इंद्रदेव को प्रसन्न करने गांव बाहर भोजन बनाकर पुरानी परंपरा निभाते किसान। नईदुनिया।HighLights
- राजगढ़ जिले में 12 दिनों से मानसून की बेरुखी के कारण सोयाबीन की फसल संकट में है
- अच्छी बारिश की कामना के लिए गांव-गांव में किसान 'उज्जैनी' जैसी पारंपरिक धार्मिक रस्में निभा रहे हैं
- पर्याप्त वर्षा नहीं हुई तो जिले में 30 प्रतिशत से अधिक सोयाबीन का रकबा प्रभावित हो सकता है
नईदुनिया प्रतिनिधि, राजगढ़/ मलावर। जिलेभर में शुरुआती बुवाई करवाने के बाद मानसून 12 दिन से गायब है। मौसम वैज्ञानिक लगातार वर्षा की संभावना जता रहे हैं, लेकिन बादल बिना पानी बरसाए लौट जा रहे हैं। वर्षा की लंबी खेंच के कारण अब किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं।
खेतों में बोई गई सोयाबीन की फसल अब संकट में है। लगभग 2 सप्ताह बीतने को हैं।
खेतों में आईं दरारें
नमी के अभाव में खेतों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ने लगी हैं। दोपहर होते ही सोयाबीन के पौधे मुरझाने लगे हैं। समय पर खरपतवार नाशक दवाई का छिड़काव भी नहीं हो पा रहा, जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ने की आशंका है। देव खेड़ी के किसान रामेश्वर नागर, जितेंद्र नागर, नंदकिशोर नागर, जमी के मोहन सिंह यादव, मलावर के अनिल गोस्वामी, अरनिया के दुलीचंद दांगी, मलावर के हुकम सिंह यादव सहित दर्जनों किसानों ने बताया कि अब एक-एक दिन फसल के लिए मुसीबत बनता जा रहा है।
कुएं और ट्यूबवेल से सिंचाई का भी विकल्प नहीं है। अब केवल अच्छी वर्षा ही फसल बचा सकती है।
गांव-गांव में पुरानी परंपरा से मना रहे इंद्रदेव
वर्षा के लिए किसान अब प्रकृति और परंपरा का सहारा ले रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जगह-जगह धार्मिक आयोजन किए जा रहे हैं। कहीं मंदिरों में सप्ताजी और अखंड भजन-पूजन हो रहे हैं तो कहीं गांव के बाहर सामूहिक रूप से भोजन बनाकर इंद्रदेव को प्रसन्न करने की पुरानी परंपरा निभाई जा रही है।
इस परंपरा को कई जगह उज्जैनी भी कहा जाता है। मान्यता है कि गांव से बाहर खुले में भोजन बनाकर सामूहिक प्रार्थना करने से इंद्रदेव प्रसन्न होते हैं और अच्छी वर्षा होती है।
महिलाएं और पुरुष मिलकर भजन गाते हैं और अच्छी फसल की कामना करते हैं।कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि सोयाबीन की फसल के लिए बुवाई के 15-20 दिन के भीतर वर्षा होना बेहद जरूरी है। यदि अगले 2-3 दिन में वर्षा नहीं हुई तो जिले में 30 प्रतिषत से अधिक सोयाबीन का रकबा प्रभावित हो सकता है।
अब सभी की निगाहें आसमान पर टिकी हैं। किसान अच्छी वर्षा की राह देख रहे हैं।