
जयदीप गुर्जर, नईदुनिया, रतलाम। रतलाम जिले में बिहार की 23 वर्षीय संध्या कुमारी की संदिग्ध मौत ने दलालों के माध्यम से कराए जा रहे अंतरराज्यीय विवाह के नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस जांच में विवाह के लिए 2.60 लाख रुपये के भुगतान और बिचौलियों की भूमिका सामने आने के बाद मामला केवल एक संदिग्ध की मौत तक सीमित नहीं रह गया है। इस घटना ने मालवा-निमाड़ में वर्षों से चल रहे उस नेटवर्क को भी चर्चा में ला दिया है, जिसके द्वारा दूसरे राज्यों की युवतियों का विवाह स्थानीय युवकों से कराया जाता है।
रतलाम, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, खरगोन और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं में पिछले कई वर्षों से बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और झारखंड आदि राज्यों की युवतियों से विवाह कराने का चलन बढ़ा है। अधिकांश मामलों में वर-वधू पक्ष पहले से एक-दूसरे को जानते तक नहीं हैं। पूरा संपर्क स्थानीय और अंतरराज्यीय दलालों के माध्यम से होता है। दूल्हा पक्ष से ढाई से पांच लाख रुपये, कई मामलों में इससे अधिक राशि ली जाती है। इस रकम का बड़ा हिस्सा बिचौलियों के बीच बंट जाता है, जबकि युवती के परिवार तक अपेक्षाकृत कम राशि पहुंचती है।
ऐसे विवाहों के पीछे सामाजिक और आर्थिक मजबूरी भी बड़ी वजह है। मालवा-निमाड़ के कई ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ समुदायों में विवाह योग्य युवतियों की कमी, बिगड़ता लिंगानुपात और आर्थिक रूप से कमजोर व अधिक उम्र के युवकों को अपने समाज में रिश्ता नहीं मिल पाना इस प्रवृत्ति को बढ़ा रहा है। दूसरी ओर, दूसरे राज्यों के गरीब परिवारों को बेहतर जीवन और आर्थिक सुरक्षा का भरोसा देकर विवाह के लिए तैयार किया जाता है। इस असंतुलन का लाभ बिचौलियों का नेटवर्क उठाता है।
इन विवाहों में सबसे बड़ी समस्या पहचान और दस्तावेजों के समुचित सत्यापन का अभाव है। कई बार विवाह मंदिरों, धर्मशालाओं या होटलों में करा दिए जाते हैं और उनका विधिवत पंजीयन भी नहीं कराया जाता। युवती के वास्तविक स्वजन, स्थायी पते और पहचान की पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं होती। विवाद की स्थिति में पीड़ित परिवार के लिए युवती या उसके वास्तविक परिवार तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
सामाजिक बदनामी के डर से कई परिवार पुलिस में शिकायत भी दर्ज नहीं कराते, जिससे ऐसे मामलों की वास्तविक संख्या सामने नहीं आ पाती। पुलिस रिकॉर्ड में ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जिनमें विवाह के कुछ दिन या सप्ताह बाद ही दुल्हन के नकदी और जेवर लेकर चले जाने की शिकायतें दर्ज हुई हैं। विवाह कराने वाले दलालों ने लाखों रुपये लेने के बाद संपर्क समाप्त कर दिया।
शासकीय अधिवक्ता संजीव सिंह चौहान का कहना है कि हर अंतरराज्यीय विवाह मानव तस्करी का मामला नहीं होता, लेकिन बिना सत्यापन और बिचौलियों के माध्यम से होने वाले ऐसे विवाह संगठित अपराधी नेटवर्क के लिए अवसर बन सकते हैं। यदि किसी युवती को झूठे वादों, धोखे या आर्थिक मजबूरी का फायदा उठाकर दूसरे राज्य लाया गया हो, उसकी पहचान छिपाई गई हो या उसके बदले आर्थिक लेन-देन हुआ हो, तो ऐसे मामलों में मानव तस्करी के पहलुओं की भी जांच आवश्यक हो जाती है। रतलाम के मामले में भी मृतका संध्या कुमारी के स्वजनों से पुलिस संपर्क नहीं कर सकी है और बिचौलिए भी फरार हैं।
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शादी के नाम पर ठगी करने वाले दलालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। ऐसे मामलों में अंतरराज्यीय पुलिस का सहयोग लिया जा रहा है। हाल ही में हुए मामलों की जांच जारी है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी आधार पर समुचित कार्रवाई होगी। - निमिष अग्रवाल, डीआईजी, रतलाम रेंज