
नईदुनिया प्रतिनिधि, रतलाम: डिजिटल अरेस्ट के नाम पर की गई अंतरराज्य साइबर ठगी के मामले में पुलिस ने असम, जम्मू-कश्मीर और पंजाब से तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक महिला भी शामिल है।
गिरफ्तार आरोपितों में पंजाब के मोहाली निवासी 27 वर्षीय मोहन पुत्र रुघनाथ काबरा, जम्मू-कश्मीर के जिला जम्मू के अखनूर निवासी 30 वर्षीय सुमीरन पुत्री स्वामी प्रसाद शर्मा और असम के डिब्रूगढ़ निवासी 37 वर्षीय सुरेश पुत्र गणेश रजक शामिल हैं। तीनों को गुरुवार को न्यायालय में पेश कर तीन दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है।
इस प्रकरण में अब तक कुल 15 आरोपितों की गिरफ्तारी हो चुकी है। एसपी अमित कुमार के निर्देशन में गठित 18 सदस्यीय एसआईटी ने तकनीकी साक्ष्यों और डिजिटल ट्रेल के आधार पर संगठित साइबर गिरोह के नेटवर्क तक पहुंच बनाई है।
मामले के अनुसार 15 नवंबर 2025 को एक रिटायर्ड प्रोफेसर को अज्ञात कॉल आया। कॉलर ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताते हुए मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर मामलों में फंसाने की धमकी दी। इसके बाद सिग्नल ऐप पर वीडियो कॉल के माध्यम से फर्जी डिजिटल जांच और अदालत जैसा दृश्य दिखाकर डिजिटल अरेस्ट का भय पैदा किया गया।
आरोपितों ने आधार कार्ड, बैंक दस्तावेज और अन्य निजी जानकारी हासिल कर 15 नवंबर से 12 दिसंबर 2025 के बीच कुल 1 करोड़ 34 लाख 50 हजार रुपये की ठगी की। मामले में तत्काल ई-एफआईआर दर्ज कर थाना दीनदयाल नगर में बीएनएस और आईटी एक्ट की धाराओं में प्रकरण पंजीबद्ध किया गया।
जांच में सामने आया कि महिला आरोपित सुमीरन शर्मा टेलीग्राम और व्हाट्सएप के जरिए एपीके फाइल भेजकर बैंक खातों का एक्सेस लेती थी और ठगी की राशि को आगे ट्रांसफर करती थी। मोहन ने पूर्व गिरफ्तार आरोपी अमरेंद्र के साथ मिलकर बैंक खाते खुलवाकर करीब दो करोड़ रुपये के फ्रॉड ट्रांजेक्शन कराए।
ठगी की राशि विभिन्न बैंक खातों और क्रिप्टो करेंसी में ट्रांसफर की गई। पुलिस टीमें अन्य फरार आरोपितों की तलाश में विभिन्न राज्यों में दबिश दे रही हैं। कार्रवाई में निरीक्षक अमित कोरी, निरीक्षक लिलियन मालवीय, एसआई अनुराग यादव, जीवन बरिया, प्रवीण वास्कले, आरक्षक तुषार सिसोदिया, मोरसिंह डामोर और पवन जाट की अहम भूमिका रही।
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