
नईदुनिया प्रतिनिधि, रीवा। मलमास के अंतिम सोमवार को देवतालाब शिव मंदिर के बाहर पुलिस की मौजूदगी में पार्किंग माफिया द्वारा दो युवकों की बर्बर पिटाई के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। खुलासा हुआ है कि घटना से 3 दिन पहले ही स्थानीय लोगों ने पुलिस अधीक्षक मऊगंज से मंदिर परिसर में चल रही अवैध वसूली की लिखित शिकायत की थी। इसके बावजूद पुलिस निष्क्रिय बनी रही और खाकी के सामने ही श्रद्धालुओं पर लाठियां बरसती रहीं।
मामला तूल पकड़ने और वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस अधीक्षक मऊगंज सुरेंद्र जैन ने खुद मोर्चा संभाल लिया है। एसपी ने कहा, "घटना बेहद गंभीर है। पुलिस की मौजूदगी में मारपीट होना शर्मनाक है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी जांच कराई जा रही है। लापरवाही मिली तो निलंबन तय है।"
इस बीच देवतालाब थाना प्रभारी राजेश पटेल की भूमिका सवालों के घेरे में आ गई है। आरोप है कि थाना प्रभारी ठेकेदार और उसके गुर्गों को बचाने में जुटे हैं। पीड़ित पक्ष का कहना है कि थाना प्रभारी यह कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं कि "फरियादी थाने नहीं आ रहा।" जबकि घायल युवकों का इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है और वे बयान देने की स्थिति में नहीं हैं।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि राजेश पटेल की व्यवस्थापना जब से लौर थाने में हुई है, तो वे लगातार खुद को विधायक का रिश्तेदार बताकर स्थानीय लोगों पर अनर्गल दबाव बनाते हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि थाना प्रभारी पहले से ही पार्किंग माफिया से मिले हुए हैं। इसी वजह से 15 दिन से लगातार दूसरे प्रदेशों से आने वाले श्रद्धालुओं के साथ मारपीट और अवैध वसूली हो रही थी, लेकिन पुलिस मौन रही।
सूत्रों के मुताबिक, मलमास शुरू होते ही देवतालाब में भीड़ बढ़ गई थी। इसका फायदा उठाकर कथित ठेकेदार और उसके गुर्गों ने मंदिर के बाहर अवैध पार्किंग वसूली शुरू कर दी। उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र से आने वाले श्रद्धालुओं से 50 से 200 रुपये तक वसूले जा रहे थे। विरोध करने पर गाली-गलौज और मारपीट की जाती थी।
पिछले 15 दिन में कम से कम 12 से ज्यादा श्रद्धालुओं के साथ बदसलूकी की घटनाएं हुईं, लेकिन डर के कारण किसी ने शिकायत दर्ज नहीं कराई। सोमवार को हुई घटना के बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा।
स्थानीय व्यापारियों ने बताया कि मंदिर परिसर में बढ़ती गुंडागर्दी को लेकर 3 दिन पहले ही एक प्रतिनिधिमंडल एसपी मऊगंज से मिला था। शिकायत में पार्किंग के नाम पर अवैध वसूली और मारपीट की घटनाओं का जिक्र किया गया था। एसपी ने तत्काल कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन थाना स्तर पर कोई एक्शन नहीं हुआ। नतीजा सोमवार को सबके सामने आ गया।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब एसपी तक शिकायत पहुंच चुकी थी, तो देवतालाब पुलिस ने कार्रवाई क्यों नहीं की? सोमवार को जब सैकड़ों लोगों के सामने युवकों को पीटा जा रहा था, तब पुलिस वाहन में बैठे जवान तमाशबीन क्यों बने रहे? क्या थाना प्रभारी का किसी तरह का दबाव था?
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घटना के बाद देवतालाब के व्यापारियों ने मंगलवार को बाजार बंद रखा। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर 48 घंटे में आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई और अवैध वसूली बंद नहीं हुई तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। एसपी ने कहा है कि नई पार्किंग व्यवस्था लागू की जाएगी। सीसीटीवी से निगरानी होगी और सादी वर्दी में पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे। फिलहाल पुलिस आरोपियों की तलाश में दबिश दे रही है।