
नईदुनिया प्रतिनिधि, रीवा। आर्थिक अपराध शाखा रीवा ने एमपी ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण की रीवा एवं मऊगंज इकाइयों में हुए बहुचर्चित डामर घोटाले का खुलासा करते हुए अधिकारियों और संविदाकारों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया है। आरोप है कि सड़क निर्माण कार्यों में निम्न गुणवत्ता के डामर का उपयोग कर इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के नाम से कूट रचित (फर्जी) इनवॉइस प्रस्तुत कर करोड़ों रुपए का भुगतान प्राप्त किया गया।
जांच में सामने आया है कि वर्ष 2017 से 2021 के बीच ठेकेदारों एवं विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से यह पूरा खेल संचालित हुआ। आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से फर्जी बिल तैयार कर विभाग में प्रस्तुत किए और भुगतान प्राप्त कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार रीवा परियोजना क्रियान्वयन इकाई में 12,71,06,372 रुपए तथा मऊगंज में 5,88,26,713 रुपए का भुगतान फर्जी इनवॉइस के माध्यम से किया गया। इस मामले में रीवा के 27 एवं मऊगंज के 17 आरोपियों के खिलाफ अपराध दर्ज किया गया है।
रीवा इकाई में तत्कालीन महाप्रबंधक राजीव कुमार द्विवेदी, कैलाश कुमार सोनी, जुगल किशोर गुप्ता, रामकुमार तिवारी, सहायक प्रबंधक मोहम्मद शाहनवाज, प्रकाश नारायण त्रिपाठी, अमरेश कुमार पाण्डेय, दिनेश कुमार शुक्ला, मुनि माधव मिश्रा, उपयंत्री दुर्गादास द्विवेदी, गीता काकोड़िया, आशीष शर्मा, वंदना पाण्डेय, प्रियंका अग्रवाल, आकांक्षा सोनी, शिवपाल सिंह परिहार सहित कई अधिकारी एवं संविदाकार शामिल हैं।
इसके अलावा संविदाकार विजय सिंह, विनय कुमार द्विवेदी, स्वतंत्र कुमार मिश्रा, प्रमोद मिश्रा, मैसर्स शांति कंस्ट्रक्शन कंपनी, के.के. सोहागौरा, रामसज्जन शुक्ला, सतेन्द्र कुमार तिवारी, रमेश कुमार गुप्ता (मैसर्स मेहर सीमेंट एंड पाइप्स), नीरज द्विवेदी, पुष्पेन्द्र सिंह, अजय मिश्रा सहित अन्य संबंधितों द्वारा यह राशि प्राप्त की गई।
मऊगंज इकाई में तत्कालीन महाप्रबंधक रामकुमार तिवारी, जुगल किशोर गुप्ता, सहायक प्रबंधक ए.के. सिंह सुजीत कुमार निगम भास्कर शर्मा, दिनेश प्रसाद तिवारी, उपयंत्री अमित कुमार गुप्ता रवि गिडवानी, उदय प्रकाश द्विवेदी शिवपाल सिंह परिहार, अरुण कुमार पटेल सहित अन्य अधिकारी एवं संविदाकारों के नाम सामने आए हैं। संविदाकारों में रामसज्जन शुक्ला, के.के. सोहागौरा, स्वामी चरण सिंह (प्रतिनिधि, मैसर्स बानको कंस्ट्रक्शन कंपनी), देवेंद्र सिंह (मैसर्स ब्रह्मदीन एंड संस), त्रिवेणी प्रसाद मिश्रा, नीरज द्विवेदी सहित अन्य शामिल हैं।
ईओडब्ल्यू ने सभी आरोपियों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) के तहत अलग-अलग प्रकरण दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। जांच जारी, और खुलासे संभव
ईओडब्ल्यू अधिकारियों के अनुसार प्रकरण की विस्तृत जांच की जा रही है और दस्तावेजों के परीक्षण के आधार पर अन्य लोगों की संलिप्तता भी सामने आ सकती है। इस बड़े घोटाले ने विभागीय कार्यप्रणाली और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।