
नीलांबुज पांडे, नईदुनिया, सीधी। जनपद पंचायत कुसमी का आदिवासी बहुल छड़हुला टोला को आखिरकार बिजली मिल ही गई। वह भी यहां की एक छात्रा (Saraswati Singh Collector for a Day Sidhi) के 'आदेश' से। 28 अप्रैल को यहां जनचौपाल लगी थी। इसमें कलेक्टर विकास मिश्रा पहुंचे। इस दौरान प्राथमिक शाला छड़हुला की चौथी कक्षा में पढ़ने वाली सरस्वती सिंह ने कलेक्टर को 20 का पहाड़ा सुनाया। कलेक्टर प्रभावित हुए और पूछा कि बड़े होकर क्या बनना चाहती हो। सरस्वती ने कहा कि वह डॉक्टर बनना चाहती है। उसने अपनी पीड़ा बयां करते हुए कहा कि गांव में बिजली नहीं है, ऐसे में रात में पढ़ाई नहीं हो पाती।

विकास मिश्रा ने सरस्वती को 25 मिनट के लिए 'कलेक्टर' बना दिया। फिर क्या था, सरस्वती ने सबसे पहले 15 दिन में बिजली चालू करने का आदेश दिए। इसका पालन भी हुआ और 13 दिन में ही सभी 40 घरों में बिजली पहुंच चुकी है। बतौर 'कलेक्टर' सरस्वती ने सड़क बनाने का आदेश भी दिए, जिसका सर्वे भी शुरू हो चुका है। बता दें, छड़हुला टोला की आबादी 207 है। इससे पहले ग्रामीण लालटेन, चिमनी या लकड़ी जलाकर उजाला करते थे।
जब पहली बार छड़हुला टोला में बिजली पहुंची तो लोगों ने बल्ब के पास स्वस्तिक का चिह्न बनाकर, फूल-अक्षत लगाकर स्वागत किया। खुद सरस्वती ने बटन दबाकर घर को रोशन किया। कक्षा पांचवीं की छात्रा सीता यादव ने कहा कि बिजली आने से गांव के छात्र-छात्राओं को पढ़ाई करने में आसानी होगी। स्कूल में कंप्यूटर का भी उपयोग कर सकेंगे।
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बिजली का काम पूरा हो गया है। सड़क निर्माण के लिए सर्वे का काम पूरा हो चुका है और जून तक निर्माण हो जाएगा। यह जानकारी ज्ञानेंद्र मिश्रा, सीईओ, जनपद पंचायत कुसमी द्वारा साझा की गई है। इस छोटे से 'आदेश' ने न केवल गांव को अंधेरे से बाहर निकाला, बल्कि सरकारी तंत्र की संवेदनशीलता और गतिशीलता की मिसाल भी पेश की है।
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