
नवदुनिया प्रतिनिधि, सागर। पुलिस विभाग में जारी पदोन्नति सूची ने सोमवार को बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। रविवार देर रात पुलिस अधीक्षक कार्यालय से आरक्षक से प्रधान आरक्षक पदोन्नति की 422 पुलिसकर्मियों की सूची जारी होते ही कई कार्यवाहक प्रधान आरक्षकों में भारी नाराजगी फैल गई। सूची में 60 से अधिक ऐसे पुलिसकर्मियों के नाम शामिल नहीं थे, जो पिछले करीब पांच वर्षों से कार्यवाहक प्रधान आरक्षक के रूप में जिम्मेदारी निभा रहे थे। सूची में नाम नहीं आने के कारण वे दोबारा आरक्षक की श्रेणी में आ गए, जिससे पूरे पुलिस महकमे में असंतोष फैल गया।
सुबह होते ही बड़ी संख्या में नाराज पुलिसकर्मी एसपी कार्यालय पहुंच गए। स्थापना शाखा में दिनभर भीड़ लगी रही और कर्मचारी अपनी गोपनीय चरित्रावली अर्थात सीआर तथा सेवा अभिलेखों में मिले अंकों की जानकारी जुटाते रहे। कई पुलिसकर्मियों ने पदोन्नति प्रक्रिया में भेदभाव और अनियमितता के आरोप लगाए। कुछ कार्यवाहक प्रधान आरक्षकों ने तो विरोध स्वरूप इस्तीफा तक लिख दिया। पुलिस के विभिन्न मैसेज ग्रुपों में भी दिनभर पदोन्नति सूची को लेकर चर्चाएं और नाराजगी का दौर चलता रहा।
सूची में नाम नहीं आने वाले कार्यवाहक प्रधान आरक्षकों का कहना था कि यदि विभाग उन्हें प्रधान आरक्षक मानने को तैयार नहीं है तो फिर पिछले पांच वर्षों से उनसे विवेचक का कार्य क्यों कराया गया। उनका कहना था कि वे अपने पास लंबित विवेचना डायरियां थाना प्रभारी को वापस सौंप देंगे। सूची में नाम न आने से गुस्साए कार्यवाहक प्रधान आरक्षकों ने अपनी अपनी वर्दी उतारकर सिविल में एसपी कार्यालय पहुंचे।
सूत्रों के अनुसार पहली सूची जारी होने के बाद स्थापना शाखा ने पदोन्नति प्रक्रिया में कई त्रुटियों की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी। इसके बाद दोपहर में संशोधित सूची जारी की गई, जिसमें कुछ नाम जोड़े गए और कुछ हटाए गए। इसके बावजूद करीब 60 कार्यवाहक प्रधान आरक्षकों के नाम अंतिम सूची में भी शामिल नहीं किए गए, जबकि कुछ अन्य आरक्षकों को पदोन्नति दे दी गई।
पुलिस विभाग के अंदर यह चर्चा भी रही कि फिटनेस सूची और आरक्षण श्रेणी को लेकर भी कई विसंगतियां सामने आई हैं। सूत्रों के अनुसार एक ही समाज से जुड़े दो कर्मचारियों में एक को अनुसूचित जाति और दूसरे को अनुसूचित जनजाति श्रेणी में शामिल किए जाने को लेकर जांच की मांग उठी है। दोनों कर्मचारी अलग-अलग थानों में पदस्थ बताए जा रहे हैं।
पदोन्नति सूची में कुछ ऐसे पुलिसकर्मियों के नाम भी शामिल होने पर सवाल उठे, जिनके खिलाफ विभागीय जांच या गंभीर आपराधिक प्रकरण लंबित बताए जा रहे हैं। इससे सूची से बाहर हुए पुलिसकर्मियों का आक्रोश और बढ़ गया। गोपालगंज थाने में तो सूची में नाम न आने के बाद कुछ कार्यवाहक प्रधान आरक्षक ने व्यंग स्वरूप मिठाई बांट कर कोर्ट जाने की बात कही।
एक कार्यवाहक प्रधान आरक्षक ने अपने इस्तीफे में लिखा कि वह वर्ष 1995 में पुलिस विभाग में भर्ती हुआ था और 30 वर्ष की सेवा के बाद भी बिना किसी विभागीय जांच या दंड के उसका नाम पदोन्नति सूची में नहीं आया। उसने आशंका जताई कि संभवतः उसका नाम गलती से छूट गया है या फिर शासन उसे पूरी सेवा अवधि में एक भी नियमित पदोन्नति नहीं देना चाहता। कई पुलिसकर्मी अब विभाग के ही खिलाफ सूची के विरोध में हाईकोर्ट में शरण में जाने की योजना बना रहे हैं।
इधर, डीआइजी कार्यालय से प्रधान आरक्षक से सहायक उप निरीक्षक (एएसआइ) पद पर 178 पुलिसकर्मियों की पदोन्नति सूची भी जारी की गई। इसमें भी पहले से कार्यवाहक एएसआइ के रूप में कार्य कर रहे एक दर्जन से अधिक कर्मचारियों को नियमित पदोन्नति नहीं मिली और उन्हें पुनः प्रधान आरक्षक की श्रेणी में रखा गया। वहीं कुछ पात्र प्रधान आरक्षकों ने पदोन्नति लेने से ही इनकार कर दिया, क्योंकि पदोन्नति के बाद दूसरे जिलों में स्थानांतरण की संभावना थी।
पदोन्नति सूची को लेकर उत्पन्न असंतोष फिलहाल पुलिस विभाग में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है। कई कर्मचारी अब सूची की समीक्षा और त्रुटियों के सुधार की मांग कर रहे हैं। एसटी वर्ग से आने वाले 2018 बैच तक के पुलिस कर्मियों को पदोन्नति दे दी गई है, इसके एवज में पूर्व में बनाए गए कार्यवाहक प्रधान आरक्षकों के नाम सूची में शामिल नहीं किए गए हैं और उनको अब तक रिवर्ड यानि पुन: मूल नियुक्ति पर भेजे जाने का कोई भी आदेश जारी नहीं किया गया है।