पद्मश्री दाऊ भगवानदास रायकवार का निधन, बुंदेलखंड की शस्त्र युद्ध कला अखाड़ा को दिलाई थी वैश्विक पहचान
83 वर्षीय दाऊ गुरु भगवानदास रायकवार बीते 17 मार्च से लगातार अस्वस्थ थे। उनका इलाज सागर के बाद, स्थिति बिगड़ने पर 7 अप्रैल को एम्स भोपाल रेफर किया गया ...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 18 Apr 2026 11:07:15 PM (IST)Updated Date: Sat, 18 Apr 2026 11:12:33 PM (IST)
पद्मश्री दाऊ भगवानदास रायकवारHighLights
- पुत्र राजकुमार के अनुसार दाऊ जी लंबे समय से श्वास समस्याओं से पीड़ित थे।
- इसी वर्ष 25 जनवरी को उन्हें प्रतिष्ठित पद्मश्री सम्मान देने की घोषणा की गई थी।
- इसे ग्रहण करने से पहले स्वास्थ्य नाजुक हो गया। शनिवार काे निधन हो गया।
नवदुनिया प्रतिनिधि, सागर। बुंदेलखंड की प्राचीन शस्त्र युद्ध कला अखाड़ा को वैश्विक पटल पर पहचान दिलाने वाले पद्मश्री गुरु भगवानदास रायकवार दाऊ का निधन शनिवार देर रात हो गया हैं। उनकी अंतिम यात्रा सुबह 12 बजे सागर के रामपुरा वार्ड स्थिति छत्रसाल अखाड़े से नरयावली नाका मुक्तिधाम जाएगी। गुरू भगवान दास रायकवार पिछले कुछ समय से बीमार थे, जिनका इलाज भोपाल के अस्पताल में चल रहा था।
जनवरी महीने में मिला था पद्मश्री अवार्ड
83 वर्षीय दाऊ गुरु भगवानदास रायकवार बीते 17 मार्च से लगातार अस्वस्थ थे। उनका इलाज सागर के बाद, स्थिति बिगड़ने पर 7 अप्रैल को एम्स भोपाल रेफर किया गया है। जहां वे वेंटिलेटर पर थे। उन्हें जनवरी महीने में ही केंद्र सरकार से पद्मश्री अवार्ड के लिए सम्मानित करने की घोषणा हुई थी।
उनके पुत्र राजकुमार रायकवार के अनुसार दाऊ जी लंबे समय से श्वास संबंधी समस्याओं से पीड़ित थे। इसी वर्ष 25 जनवरी को उन्हें प्रतिष्ठित पद्मश्री सम्मान देने की घोषणा की गई थी, जिसे ग्रहण करने से पूर्व ही उनका स्वास्थ्य नाजुक हो गया। शनिवार रात भोपाल में उनका निधन हो गया है।
लाठी और शस्त्र कला के माध्यम से भारतीय संस्कृति को जीवित रखने वाले संरक्षक दाऊ के निधन पर सागर शहर में शोक की लहर छा गई है। इसके पहले पिछले साल बुंदेली राई को विश्व पटल पर पहुंचने वाले पद्मश्री से सम्मानित रामसहाय पांडे का निधन हुआ था।