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डिजिटल फरमान बनाम जमीनी हकीकत: ई-अटेंडेंस के लिए नेटवर्क का एक-दो घंटे तक इंतजार करते हैं मैहर के शिक्षक

प्राथमिक से लेकर उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के लिए ई-अटेंडेंस अनिवार्य है, लेकिन क्षेत्र में किसी भी मोबाइल कंपनी का नेटवर्क उपलब्ध नहीं ह...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Sat, 15 Aug 2026 12:34:51 PM (IST)Updated Date: Sat, 15 Aug 2026 12:38:18 PM (IST)
डिजिटल फरमान बनाम जमीनी हकीकत: ई-अटेंडेंस के लिए नेटवर्क का एक-दो घंटे तक इंतजार करते हैं मैहर के शिक्षक
पहाड़ी पर चढ़कर उपस्थिति दर्ज करने का प्रयास करते हुए अतिथि शिक्षक। सौजन्‍य शिक्षक

HighLights

  1. ई-अटेंडेंस नेटवर्क के लिए पहाड़ियों पर चढ़ रहे मैहर के शिक्षक

नईदुनिया प्रतिनिधि, मैहर। जिले के जनपद शिक्षा केंद्र रामनगर अंतर्गत ग्राम पंचायत कंदवारी के मूर्तिहाई क्षेत्र में डिजिटल व्यवस्था की जमीनी हकीकत सरकारी दावों पर सवाल खड़े कर रही है। शिक्षक रोजाना स्कूल परिसर से दूर पेड़ों और पहाड़ियों पर जाकर मोबाइल सिग्नल तलाशने को मजबूर हैं।

एक-दो घंटे तक इंतजार करना पड़ता

शिक्षकों का कहना है कि नेटवर्क की तलाश में उन्हें एक-दो घंटे तक इंतजार करना पड़ता है। कई बार सिग्नल मिलने के बजाय मोबाइल स्क्रीन पर ‘नो इंटरनेट’ या ‘502 बैड गेटवे’ जैसे एरर दिखाई देते हैं।

पढ़ाई भी हो रही प्रभावित

शिक्षकों के अनुसार ऑनलाइन हाजिरी लगाने के लिए स्कूल समय में नेटवर्क तलाशना पड़ता है। इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। वहीं जरूरी फोन कॉल, ऑनलाइन भुगतान और परिवार से संपर्क जैसी रोजमर्रा की सुविधाएं भी प्रभावित हो रही हैं।


ग्रामीणों और शिक्षकों का कहना है कि समस्या को लेकर कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन अब तक मोबाइल टावर या नेटवर्क की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई।

जब गांव में नेटवर्क नहीं है तो डिजिटल व्यवस्था कैसे

शिक्षकों और ग्रामीणों ने कंदवारी-मूर्तिहाई क्षेत्र में मोबाइल टावर लगाने, नेटवर्क उपलब्ध होने तक ऑफलाइन अटेंडेंस की व्यवस्था करने और ई-अटेंडेंस में समय की छूट देने की मांग की है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब गांव में मोबाइल नेटवर्क ही उपलब्ध नहीं है तो डिजिटल व्यवस्था को कैसे प्रभावी बनाया जा सकता है।

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