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MP में सरकारी दावों की खुली पोल, सीहोर और भोपाल में नहीं मिला ''फैक्टर VIII'' इंजेक्शन, पीडि़त बच्‍चे ने जनता से लगाई मदद की गुहार

आष्टा तहसील के ग्राम गुराडिया रूपचन्द्र निवासी श्रवण कुमार मेवाड़ा के बच्चों को पिछले 21 दिनों से जीवन रक्षक ''फैक्टर VIII'' इंजेक्शन नहीं मिल सका है।...और पढ़ें

By Akash MathurEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Tue, 23 Jun 2026 12:12:55 AM (IST)Updated Date: Tue, 23 Jun 2026 07:18:22 AM (IST)
MP में सरकारी दावों की खुली पोल, सीहोर और भोपाल में नहीं मिला ''फैक्टर VIII'' इंजेक्शन, पीडि़त बच्‍चे ने जनता से लगाई मदद की गुहार
फोटो सीहोर। लोगों से मदद की गुहार लगाता बीमार बच्चा। नवदुनिया

HighLights

  1. सीहोर में हीमोफीलिया पीड़ित बच्चों को 21 दिन से नहीं मिला इंजेक्शन।
  2. दवा के अभाव में मासूमों की जान पर बनी, अस्पताल के सामने बैठे।
  3. सड़क पर बैठा पीडि़त का परिवार। चक्काजाम से वाहनों की लंबी कतार।

नवदुनिया प्रतिनिधि, सीहोर। जिला अस्पताल के सामने सोमवार को उस समय अफरा-तफरी और हंगामे की स्थिति निर्मित हो गई, जब हीमोफीलिया से पीड़ित अपने दो मासूम बच्चों की जान बचाने के लिए एक बेबस पिता को पूरे परिवार सहित मुख्य सड़क पर बैठकर चक्काजाम करना पड़ा।

आष्टा तहसील के ग्राम गुराडिया रूपचन्द्र निवासी श्रवण कुमार मेवाड़ा के बच्चों को पिछले 21 दिनों से जीवन रक्षक ''फैक्टर VIII'' इंजेक्शन नहीं मिल सका है। अस्पताल और प्रशासनिक स्तर पर कोई सुनवाई न होने से हताश पिता ने अंततः यह कदम उठाया।


इंदोर-भोपाल व्यस्त मुख्य मार्ग पर पीड़ित परिवार के बैठते ही दोनों ओर वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लग गईं। चक्काजाम के कारण जिला अस्पताल से लेकर बढ़ियाखेड़ी माता मंदिर और कलेक्टर बंगले तक वाहनों के पहिए पूरी तरह थम गए।

वहीं दूसरी तरफ गंगा आश्रम के आगे तक वाहनों की कतार लग गई और भीषण जाम की स्थिति निर्मित हो गई। मुख्य मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध होने से कई आवश्यक वाहन, राहगीर और वाहन चालक घंटों परेशान होते नजर आए।

बेरोजगारी और आर्थिक तंगी बनी लाचारी, प्रशासन से मांगी मदद

  • पीड़ित बच्चों हर्ष और केशव के पिता श्रवण कुमार मेवाड़ा ने बताया कि उनके दो बच्चे हीमोफीलिया नामक गंभीर बीमारी से ग्रसित हैं, जिसमें चोट लगने या आंतरिक रक्तस्राव होने पर खून का थक्का नहीं जमता।
  • इसके इलाज के लिए डाॅक्टरों ने नियमित रूप से ''फैक्टर VIII'' इंजेक्शन अनिवार्य बताया है। श्रवण ने रोते हुए कहा कि मैं बेरोजगार हूं, आर्थिक स्थिति अत्यंत कमजोर है।
  • निजी मेडिकल स्टोर पर यह इंजेक्शन बहुत महंगा मिलता है, जिसे खरीदने में मैं पूरी तरह असमर्थ हूं।
  • सरकारी स्तर पर सीहोर और भोपाल दोनों ही जगह पिछले तीन सप्ताह से यह दवा उपलब्ध नहीं होने के कारण बच्चों की जान दांव पर लगी है।
  • श्रवण ने बीते 19 जून को कलेक्टर को भी आवेदन सौंपकर गुहार लगाई थी कि यदि मध्य प्रदेश में दवा उपलब्ध नहीं है, तो उन्हें बच्चों के बेहतर इलाज के लिए मुंबई जाने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जाए, ताकि बच्चों की जान बचाई जा सके।

सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे सिविल सर्जन

  • अस्पताल के ठीक सामने चक्काजाम और भारी हंगामे की सूचना मिलते ही जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन उमेश श्रीवास्तव तत्काल अपने प्रशासनिक अमले के साथ मौके पर पहुंचे।
  • उन्होंने सड़क पर बैठे पीड़ित परिवार से संवेदनशीलता के साथ बातचीत की और उनकी गंभीर समस्या को सुना।
  • सिविल सर्जन ने पीड़ित पिता को जल्द से जल्द अस्पताल स्तर पर आवश्यक ''फैक्टर VIII'' इंजेक्शन की व्यवस्था कराने का ठोस आश्वासन दिया, जिसके बाद परिवार सड़क से हटा और यातायात बहाल हो सका।