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सीहोर में 28 करोड़ के निर्माणाधीन ओवरब्रिज के खतरनाक घुमावदार डिजाइन पर उठे सवाल, ड्रोन फुटेज ने खोली लापरवाही की पोल

सीहोर में 28 करोड़ रुपए का निर्माणाधीन हाउसिंग बोर्ड ओवरब्रिज राजगढ़ जैसी घटना का कारण बन सकता है। सीहोर का यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट 700 मीटर लंबा औ...और पढ़ें

By Akash MathurEdited By: Mohan Kumar
Publish Date: Sat, 29 Aug 2026 01:50:19 PM (IST)Updated Date: Sat, 29 Aug 2026 01:50:19 PM (IST)
सीहोर में 28 करोड़ के निर्माणाधीन ओवरब्रिज के खतरनाक घुमावदार डिजाइन पर उठे सवाल, ड्रोन फुटेज ने खोली लापरवाही की पोल
फोटो सीहोर। हाउसिंग बोर्ड का निर्माणाधीन ओवर ब्रिज, जिस पर दिखाई दे रहे घुमावदार मोड़। नवदुनिया

HighLights

  1. सीहोर रेलवे ओवरब्रिज के जानलेवा मोड़ पर उठे सवाल
  2. इंजीनियरिंग की चूक या निजी जमीन बचाने की मजबूरी
  3. ब्यावरा जैसी पुनरावृत्ति की आशंका जताई जा रही है

नवदुनिया प्रतिनिधि, सीहोर। शहर के व्यस्ततम पुराने इंदौर-भोपाल स्टेट हाईवे पर हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के पास रेलवे फाटक क्रमांक 104 पर निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज शुरू होने से पहले ही गंभीर विवादों और तकनीकी खामियों के घेरे में आ गया है। 28 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हो रहे इस ओवरब्रिज का अत्यधिक घुमावदार डिजाइन भविष्य में बड़े हादसों का सबब बन सकता है। हाल ही में राजगढ़ जिले के ब्यावरा बायपास पर बने एक घुमावदार ब्रिज पर हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है।

वहां स्लीपर बस के तीखे मोड़ पर अनियंत्रित होकर सेफ्टी वाल से घिसटने के कारण चार यात्रियों की दर्दनाक मौत हो गई और 12 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इस हादसे के बाद अब सीहोर के निर्माणाधीन हाउसिंग बोर्ड ओवरब्रिज की सुरक्षा को लेकर भी शहरवासियों के बीच आक्रोश और भय व्याप्त हो गया है।


इंजीनियरिंग की चूक या निजी जमीन बचाने की मजबूरी

सीहोर का यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट 700 मीटर लंबा और 15 मीटर चौड़ा है, जिसे 24 पिलरों पर खड़ा किया गया है। रेलवे ट्रैक से इसकी ऊंचाई करीब 7.30 मीटर रखी गई है। इस ब्रिज का मुख्य उद्देश्य हाउसिंग बोर्ड से चाणक्यपुरी को जोड़ना और भोपाल-इंदौर पुराने मार्ग पर लगने वाले भीषण जाम से निजात दिलाना था। हैरानी की बात यह है कि ब्रिज की जो रूपरेखा धरातल पर उतारी गई है, उसमें अत्यधिक तीखा और असामान्य मोड़ दे दिया गया है। ड्रोन कैमरों से सामने आई तस्वीरों ने इस बड़ी लापरवाही की पोल खोल दी है।

स्थानीय नागरिकों का सीधा आरोप है कि ब्रिज की प्लानिंग के समय अधिकारियों ने जमीनी हकीकत को पूरी तरह नजरअंदाज किया। जहां ब्रिज का ढलान नीचे उतरना था, वहां निजी जमीनों का पेंच फंस रहा था। निजी भूमि के अधिग्रहण से बचने या चहेतों को लाभ पहुंचाने के चक्कर में ब्रिज के मूल अलाइनमेंट को बदलकर खतरनाक तरीके से घुमावदार बना दिया गया।

ब्यावरा जैसी पुनरावृत्ति की आशंका

स्थानीय नागरिकों और यातायात जानकारों का कहना है कि यह पुराना स्टेट हाईवे है, जहां दिन-रात भारी वाहनों, यात्री बसों और निजी गाड़ियों का भारी दबाव रहता है। ऐसे में तेज गति से आने वाले वाहनों के लिए यह घुमावदार ब्रिज किसी ब्लैक स्पाट से कम साबित नहीं होगा। रात के समय या कोहरे के दिनों में तीखे मोड़ पर चालकों का संतुलन बिगड़ने का खतरा सबसे अधिक रहेगा।

यह भी पढ़ें- भोपाल बायपास ओवरब्रिज पर हुए स्लीपर बस हादसे में कर्नाटक के साइबर इंस्पेक्टर समेत 4 की मौत, 12 घायल

जिस तरह ब्यावरा में चालक घुमाव का सही अनुमान नहीं लगा सका और बस कंक्रीट बाउंड्री से टकरा गई, ठीक वैसा ही खतरा इस ब्रिज पर भी हर पल मंडराता रहेगा। ब्रिज कार्पोरेशन द्वारा हाल ही में इस पर लोड टेस्टिंग की औपचारिकता पूरी कर ली गई है, लेकिन धरातल पर सुरक्षा मानकों की खुली अनदेखी की जा रही है।