• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • शारदीय नवरात्रि
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • सीहोर

सीहोर के सेठ जुम्मा लाल ने 1917 में दिया था ₹35 हजार का कर्ज, 109 साल बाद ब्रिटेन ने देने से किया इनकार

ब्रिटिश सरकार ने प्रथम विश्व युद्ध के समय लिए 35 हजार रुपये के कर्ज की देनदारी से इन्कार कर दिया है। यह कर्ज सीहोर के प्रसिद्ध सेठ रुठिया के परिवार के...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Sun, 18 Oct 2026 10:47:38 PM (IST)Updated Date: Sun, 18 Oct 2026 10:47:38 PM (IST)
सीहोर के सेठ जुम्मा लाल ने 1917 में दिया था ₹35 हजार का कर्ज, 109 साल बाद ब्रिटेन ने देने से किया इनकार
प्रथम विश्व युद्ध के ₹35,000 के कर्ज से मुकरा ब्रिटेन

HighLights

  1. प्रथम विश्व युद्ध के ₹35,000 के कर्ज से मुकरा ब्रिटेन
  2. सीहोर के सेठ जुम्मा लाल रुठिया ने 1917 में दिया था कर्ज
  3. यूके सरकार ने आधिकारिक रिकॉर्ड न होने का दिया हवाला

नईदुनिया प्रतिनिधि, सीहोर। ब्रिटिश सरकार ने प्रथम विश्व युद्ध के समय लिए 35 हजार रुपये के कर्ज की देनदारी से इन्कार कर दिया है। यह कर्ज सीहोर के प्रसिद्ध सेठ रुठिया के परिवार के सदस्य ने दिया था। रुठिया परिवार ने पिछले दिनों नोटिस भेजा था। अब ब्रिटेन (यूके) के ऋण प्रबंधन कार्यालय ने ईमेल भेजकर कहा है कि उनके पास इस कर्ज का कोई रिकार्ड मौजूद नहीं है।

1917 में सेठ जुम्मा लाल रुठिया ने दिया था प्रथम विश्व युद्ध के दौरान कर्ज

दरअसल सीहोर जिले के रुठिया परिवार ने दावा किया है कि उनके पूर्वज सेठ जुम्मा लाल रुठिया ने 1917 में प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सरकार को 35 हजार रुपये का कर्ज दिया था। यह रकम ब्रिटिश सरकार ने कभी वापस नहीं की। इसकी वसूली के लिए कारोबारी विनय रुठिया ने अपने अधिवक्ता श्रेयांश रानीवाला के जरिए यूके (ब्रिटेन) सरकार को कानूनी नोटिस भेजा।


तीन अगस्त को ब्रिटेन के ऋण प्रबंधन कार्यालय ने ईमेल भेजकर रुठिया परिवार से इस कर्ज से संबंधित दस्तावेज, शर्तें व आवश्यक प्रमाण उपलब्ध कराने को कहा था।

ऐतिहासिक रिकॉर्ड में नहीं मिला कोई प्रमाण, कानूनी जिम्मेदारी से झाड़ा पल्ला

इसके बाद विनय रुठिया ने ब्रिटिश सरकार के पोलिटिकल एजेंट के हस्ताक्षरयुक्त लिखित दस्तावेज और प्रमाणित रिकॉर्ड भेजे थे। यूके ऋण प्रबंधन कार्यालय के संचार विभाग ने 16 अक्टूबर को ईमेल के जरिए अपना जवाब भेजा है। इसमें कहा गया कि दावे की गहन जांच की गई, लेकिन उनके विभाग में इस कथित कर्ज का कोई आधिकारिक रिकार्ड या प्रमाण मौजूद नहीं है।

यह भी पढ़ें- ओंकारेश्वर सोमवार से दो दिन तक रहेगा बंद, तीर्थयात्रियों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, विकास योजनाओं के विरोध में फैसला

इस आधार पर यूके सरकार ने भुगतान की किसी भी कानूनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है। विनय रुठिया इससे संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि यूके सरकार को इस ऐतिहासिक ऋण से संबंधित मामलों में पूरी पारदर्शिता बरतनी चाहिए।