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सीहोर शिक्षा विभाग की पदोन्नति लिस्ट पर बवाल: सीनियर्स को ठेंगा, चहेते जूनियर्स को लाभ देने का आरोप

हैरान करने वाली बात यह है कि इस सूची में कई ऐसे कर्मचारियों के नाम गायब हैं जो अगले 1 से 2 साल के भीतर रिटायर होने वाले हैं। नियमतः इन्हें इस पदोन्नति...और पढ़ें

By Akash MathurEdited By: Mohan Kumar
Publish Date: Wed, 08 Jul 2026 11:47:13 AM (IST)Updated Date: Wed, 08 Jul 2026 11:48:32 AM (IST)
सीहोर शिक्षा विभाग की पदोन्नति लिस्ट पर बवाल: सीनियर्स को ठेंगा, चहेते जूनियर्स को लाभ देने का आरोप
जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय सीहोर। नवदुनिया

HighLights

  1. सीहोर शिक्षा विभाग की पदोन्नति सूची पर बवाल
  2. वरिष्ठों को ठेंगा, चहेते जूनियरों को लाभ देने का आरोप
  3. 37 लिपिकीय कर्मचारियों की सूची में भारी विसंगति

नवदुनिया प्रतिनिधि, सीहोर। जिला शिक्षा कार्यालय एक बार फिर अपनी विवादित कार्यप्रणाली को लेकर सुर्खियों में है। इस बार मामला लोक सेवकों की पदोन्नति और क्रमोन्नति सूची में वरिष्ठता नियमों को ताक पर रखने का है। विभाग द्वारा लिपिक संवर्ग के कर्मचारियों की पदोन्नति प्रक्रिया के तहत मार्च 2026 की स्थिति में गोपनीय चरित्रावली और अन्य जरूरी दस्तावेज मांगे गए हैं। लेकिन जैसे ही 37 कर्मचारियों की यह सूची सार्वजनिक हुई, विभाग के भीतर ही बगावत के सुर तेज हो गए हैं।

आरोप है कि सालों से अपनी सेवाएं दे रहे वरिष्ठ कर्मचारियों का हक मारकर पसंदीदा और जूनियर कर्मचारियों को पिछले दरवाजे से उपकृत करने का खेल खेला जा रहा है। मिली जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम 2025 के तहत समय-सीमा में इस कार्रवाई को पूरा किया जाना है। इसके लिए जारी आदेश क्रमांक/स्था.4/पदो./भृत्य-लिपिक/2026/2081 के तहत 37 लिपिकों के नाम तय किए गए हैं।


कई ऐसे नाम गायब, जिन्हें लाभ मिलना चाहिए

हैरान करने वाली बात यह है कि इस सूची में कई ऐसे कर्मचारियों के नाम गायब हैं जो अगले 1 से 2 साल के भीतर सेवानिवृत्त होने वाले हैं। नियमतः इन्हें इस पदोन्नति का लाभ पहले मिलना चाहिए था, लेकिन इन्हें पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है।

इस घोर लापरवाही के खिलाफ अनुसूचित जाति व जनजाति अधिकारी-कर्मचारी संघ ने मोर्चा खोलते हुए जिला प्रशासन और विभागीय अधिकारियों को लिखित आपत्ति दर्ज कराई है। संघ का आरोप है कि पदक्रम सूची में वर्ष 1992 और 2001 से कार्यरत वरिष्ठ एससी-एसटी कर्मचारियों के नाम जानबूझकर विलोपित कर दिए गए हैं, जबकि वर्ष 2007 में भर्ती हुए सामान्य और ओबीसी वर्ग के जूनियर कर्मचारियों के नामों को प्राथमिकता के साथ शामिल किया गया है।

विभाग के पहले भी की गड़बड़ी, चार शिक्षकों का हक मारा

सीहोर शिक्षा विभाग में पात्रता के साथ खिलवाड़ का यह कोई पहला मामला नहीं है। विभाग की फाइलों में दबकर पात्र कर्मचारियों का हक मरने का पुराना इतिहास रहा है। इसका ताजा उदाहरण कलेक्ट्रेट जनसुनवाई में पहुंचा वह मामला है, जहां विभाग की सुस्ती के कारण चार शिक्षक आज भी वरीयता के लिए भटक रहे हैं। शिक्षक विजय वर्मा, नरेश मेवाड़ा, विनोद कुमार और राजेंद्र बडोदिया की सेवा के 12 वर्ष 5 जुलाई 2025 को ही पूरे हो चुके थे। संबंधित संकुल केंद्र ने तत्परता दिखाते हुए 21 जुलाई 2025 को ही इनकी क्रमोन्नति का प्रस्ताव डीईओ कार्यालय सीहोर भेज दिया था।

डीईओ कार्यालय के बाबू और अधिकारियों ने इस फाइल को दबाए रखा, जिसके कारण यह प्रस्ताव समय पर संयुक्त संचालक भोपाल कार्यालय नहीं पहुंच सका। नतीजा यह हुआ कि 6 मार्च 2026 को जब संभाग की क्रमोन्नति सूची जारी हुई, तो इन चारों शिक्षकों के नाम गायब थे। विभाग की इस अक्षम्य लापरवाही के कारण ये शिक्षक भारी मानसिक तनाव में हैं और अब अपनी क्रमोन्नति और वरीयता बहाल कराने के लिए कलेक्टर की चौखट पर गुहार लगा रहे हैं।

यह भी पढ़ें- प्रमोशन में आरक्षण: पदोन्नति प्रक्रिया पर रोक लगाने से हाई कोर्ट का फिलहाल इनकार, अब 13 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

पदोन्नति सूची के मुख्य विवादित बिंदु

37 कर्मचारियों की सूची: क्रमोन्नति/पदोन्नति के नाम पर गुपचुप तरीके से तैयार की गई सूची पर गंभीर सवाल।

वरिष्ठता दरकिनार: वर्ष 1992 और 2001 के अनुभवी और वरिष्ठ कर्मचारियों को प्रक्रिया से रखा बाहर।

जूनियरों पर मेहरबानी: नियम विरुद्ध जाकर वर्ष 2007 के जूनियर कर्मचारियों को सूची में दी गई जगह।

न्यायालय जाने की तैयारी: पीड़ित कर्मचारियों और कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यदि इस दोषपूर्ण सूची को तुरंत संशोधित नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन और न्यायालय की शरण लेने के लिए बाध्य होंगे।

उच्च अधिकारियों को सूचित किया जाएगा

कर्मचारियों की समस्या को उच्च अधिकारियों को बताया जाएगा। इसके बाद आगे की कार्रवाई निर्देश अनुसार की जाएगी। - यूनिस अंसारी, प्रभारी बीईओ।