शिवपुरी में अब बिना ई-टोकन नहीं मिलेगा खाद, किसान निधि से लिंक हो रहा डाटा
अगर आनलाइन सिस्टम से किसान नहीं जुड़ेगा तो वह खाद के लिए परेशान हो सकता है। ...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 02 May 2026 02:41:21 PM (IST)Updated Date: Sat, 02 May 2026 02:42:18 PM (IST)
खरीफ फसल के लिए तैयार होते खेत। नईदुनियाHighLights
- एग्री स्टैक और फार्मर आईडी से जुड़ रहे किसान
- ऑनलाइन सिस्टम से रुकेगी खाद की कालाबाजारी
- खरीफ सीजन से पहले जिले में पहुंची 1000 एमटी खाद रैक
नईदुनिया प्रतिनिधि, शिवपुरी। जब भी फसल बुवाई का सीजन आता है तब किसानों को खाद के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। कहीं खाद नहीं मिलता तो कहीं खाद की कालाबाजारी के आरोप लगाए जाते हैं। जहां तक कि किसानों को खाद के लिए रतजगा करना पड़ता है। ऐसी समस्याओं को देखते हुए सरकार ने खाद वितरण की व्यवस्था को डिजिटल सिस्टम से जोड़ दिया है। ऐसे किसान जो किसान निधि से जुड़े हैं उनका डाटा खाद वितरण सिस्टम से भी जोड़ा जा रहा है। साथ ही किसानों को एग्री स्टैप पर भी पंजीयन कराने के लिए जागरूक किया जा रहा है। अगर आनलाइन सिस्टम से किसान नहीं जुड़ेगा तो वह खाद के लिए परेशान हो सकता है।
पता चल सकेगा कितना खाद मिला
क्योंकि बिना ई-टोकन के न तो सोसायटी पर खाद दिया जाएगा और न ही बाजार या गोदामों पर मिलेगा। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि आनलाइन सिस्टम से जुड़ने पर किसान का पूरा जमीनी ब्यौरा सामने आ जाएगा। यह भी पता चल सकेगा कि उक्त किसान को कितना खाद दिया जा चुका है। इससे खाद की कालाबाजारी भी रुक सकेगी। एक दूसरे के नाम पर लोग खाद नहीं ले सकेंगे।
किसान निधी से दो लाख किसान जुड़े हैं
जिलेभर में करीब सवा दो लाख किसान हैं जो किसान निधि से भी जुड़े हुए हैं। करीब 60 से 70 फीसदी किसानों के पंजीयन किसान फार्मर आइडी व एग्री स्टैप से जुड़ चुके हैं। यानी एक क्लिक में किसान का पूरा डाटा सामने आ सकेगा। कृषि विभा के डीडीए पीएस करोरिया के मुताबिक सरकार ने ई विकास प्रणाली लागू की है। जिसके तहत किसानों को एग्री स्टैप से किसानों को जोड़ा जा रहा है। करीब 60 से 70 फीसदी किसान जुड़ चुके हैं। अब किसानों को ई सिस्टम के तहत की खाद का विरतण किया जाएगा।
खाद को लेकर यह होता रहा है
चाहे रबी सीजन बुवाई की बात करें या खरीफ सीजन की कहें। जब भी फसल बुवाई का समय आता है तब किसानों की भीड़ खाद केंद्रों पर होती रही है। जहां किसानों को खाद नहीं मिल पाता और वह धरना प्रदर्शन और हंगामा करने तक मजबूर होते रहे हैं। इधर किसानों को जब खाद नहीं मिल पाता तो बाजार में खाद ब्लैक में बेचा जाने लगता है। एक-एक यूरिया खाद की बोरी पर किसानों को 400 से 500 रुपए तक कालाबाजारी देनी पड़ती रही है।
अब खरीफ फसल की तैयारी में जुटे किसान, खाद की रैक भी आई
किसान अब खरीफ फसल की तैयारियों में जुट गए हैं। गर्मी में मिट्टी तप जाए इसे लेकर खेतों की जुताई होने लगी है। बारिश होते ही वह खरीफ की बुवाई करनी शुरू करेंगे। इधर किसानों को खाद की समस्या नहीं आए इसे लेकर प्रशासन ने खाद मंगाना शुरू कर दिया है। शुक्रवार को एक हजार मीट्रिक टन की रैक आई है। हालांकि जिले में खाद का अभी स्टाक है।