मामला गंभीर लगा तो जिला अस्पताल रेफर कर दिया
जानकारी के अनुसार पिछोर के ग्राम क्यारा निवासी जिनेंद्र जाटव की पांच माह की गर्भवती पत्नी पिंकी जाटव के पेट में दर्द हुआ तो वह उसे 11 जून की सुबह 7 बजे उपचार के लिए पिछोर स्वास्थ्य केंद्र लेकर आया। वहां डॉक्टरों ने दोपहर 1:30 बजे तक प्रयास किए लेकिन जब उन्हें मामला गंभीर लगा तो उन्होंने पिंकी को जिला अस्पताल रेफर कर दिया।
जिला अस्पताल में 11 जून को दोपहर में भर्ती करवाया गया
जिला अस्पताल में 11 जून को दोपहर 3 बजे पिंकी को भर्ती करवाया गया। जिनेंद्र के अनुसार इसके बाद पिंकी के साथ उसकी मां रामवती थी, जो कुछ भी नहीं जानती हैं। जिनेंद्र के अनुसार 12 जून को सुबह गार्ड ने उसे अंदर जाने दिया तब वह पिंकी से मिला तो उसने बताया कि उसे पेट दर्द मे कोई आराम नहीं मिल रहा है।
दर्द से तड़प रही पत्नी का इलाज कर रहे डॉ क्टरों से मिलना चाहता था
इसी चलते दोपहर में वह दर्द से तड़प रही अपनी पत्नी का उपचार कर रहे डॉ क्टरों से मिलने के लिए अंदर जाना चाहता था। गार्ड ने उसे अंदर नहीं जाने दिया। इस बात पर विवाद बढ़ गया और महिला गार्ड ने उसके साथ अभद्रता की और उसके साथ हाथापाई करते हुए उसकी शर्ट फाड़ दी।
धक्का देकर मेटरनिटी विंग से बाहर अस्पताल के ग्राउंड में ले आई तथा उसे धमकी दी कि वह उसे महिला गार्ड से अभद्रता करने के आरोप में जेल भिजवा देगी।
हंगामा के बाद अस्पताल प्रबंधन हरकत में आया
पीड़ित के अनुसार परिसर में हंगामा के बाद अस्पताल प्रबंधन हरकत में आया, आनन-फानन में पिंकी का अल्ट्रासाउंड कराया गया और मेडिकल कॉ लेज रेफर कर दिया, जहां उसे भर्ती किया गया है। जिनेंद्र का कहना है कि वह डॉक्टर से मिलकर यही जानना चाहता था कि जिला अस्पताल में उसकी पत्नी का इलाज संभव है या नहीं।
उसके अनुसार अगर अस्पताल के डॉक्टरों के पास उसकी पत्नी का कोई उपचार नहीं था तो फिर 20 घंटे तक उसे अस्पताल में भर्ती करके आखिर क्या करते रहे?
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अंदर नहीं जाने देना था तो फिर गेट पास का पैसा क्यों?
परिजन का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने गेट पास के नाम पर उससे 2-3 बार पैसे लिए, लेकिन दर्द से तड़पती महिला को देखने तक नहीं दिया। प्रसूताओं के अन्य स्वजनों का भी कहना है कि अगर पुरुष अटेंडरों को अंदर जाने ही नहीं दिया जाता है तो फिर उनसे गेट पास के नाम पर पैसा क्यों वसूल किया जा हरा है।
जिनेंद्र सहित कुछ अन्य अटेंडरों का दावा है कि अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज निकलवा लो। मेरे साथ ही नहीं, कई मरीजों-परिजनों के साथ ऐसा हो रहा है।
वह पुरुष अटेंडर महिला गार्ड से अभद्रता कर रहा था। उसके हाथ पकड़ लिए। एक बार अंदर जा चुका था, इसके बाद भी अंदर जाने की इच्छा जाहिर कर रहा था। उसे डॉक्टर से मिलना था तो डॉक्टर बाहर आ जाता। इसमें पुरुष अटेंडर ही गलत था।
-डॉ बीएल यादव, सिविल सर्जन