नईदुनिया प्रतिनिधि शिवपुरी। तेंदुआ थानांतर्गत ग्राम डेहरवारा में 22 अप्रैल को रामसखी पत्नी स्व लक्ष्मीनारायण धाकड़ उम्र 62 साल की अज्ञात हत्यारोपितों ने दोपहर करीब दो बजे गोली मारकर हत्या कर दी थी। पुलिस ने इस अंधे हत्याकांड के मामले का खुलासा कर दिया है।
सौतेले नाती पुष्पराज दिया अंजाम
हत्या की इस जघन्य वारदात को महिला के सौतेले नाती पुष्पराज उर्फ प्राकुल पुत्र कमलेश धाकड़ उम्र 21 साल निवासी ग्राम बराकलां तहसील विजयपुर थाना विजयपुर जिला श्योपुर ने अपने दोस्त निकेंद्र रावत पुत्र स्व. अमर सिंह रावत उम्र 23 साल ग्राम गिरमानी थाना गोवर्धन जिला शिवपुरी हाल भरत यादव का मकान पीएस होटल के पास के साथ मिलकर अंजाम दिया।
गलतफहमी में रामसखी को हो गई हत्या
पुलिस पूछताछ में उन्होंने बताया कि वह रामसखी की नहीं बल्कि उसके बेटे मुनेश की हत्या करने के लिए पहुंचे थे, परंतु गलतफहमी के चलते रामसखी को गोली मार दी। पुलिस ने दोनों हत्यारोपितों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। इस पूरे हत्याकांड की करैरा एसडीओपी संजय मिश्रा ने मॉनिटरिंग की तेंदुआ थाना प्रभारी नीतू धाकड़ के साथ मिलकर हर बिंदु पर जांच करवाई। इसी का परिणाम रहा कि महज दस दिन के भीतर पूरा मामला सुलझ गया।
मुनेश को क्यों मारना चाहता था पुष्पराज
दरअसल, डेहरवारा निवासी स्व. लक्ष्मीनारायण धाकड़ के यहां तीन बेटे और तीन बेटियां हैं। करीब 25 साल पहले लक्ष्मीनारायण की पत्नी के देहांत के बाद उसने दूसरी शादी रामसखी धाकड़ (जिस महिला की हत्या हुई) से की थी। रामसखी पहले से तलाकशुदा थी और उसके साथ एक बेटा मुनेश भी आया। पूरा परिवार साथ रहता था, इसी क्रम में मुनेश धाकड़ करीब 23 साल पहले अपनी ही एक सौतेली बहन को घर से भगाकर ले गया। हालांकि बाद में पारिवारिक दबाव और समझाइश के बाद दोनों लौटकर घर आ गए।
सौतेली बहन की चरित्र को लेकर की थी बातें
लक्ष्मीनारायण ने अपनी बेटी की शादी कर दी और मुनेश को घर से भगा दिया, वह इंदौर जाकर रहने लगा। इसी क्रम में एक साल पहले जब लक्ष्मीनारायण की मौत हो गई तो पहली पत्नी के बच्चे खेत पर घर बनाकर रहने लगे, गांव वाले मकान पर रामसखी अकेली रह गई। इसी कारण लगभग दो महीने पहले मुनेश मां के पास गांव लौट आया। मुनेश ने गांव लौटने के बाद अपनी उसी सौतेली बहन के चरित्र को लेकर उल्टी-सीधी बातें गांव व विजयपुर में करना शुरू कर दीं, जिसे वह लेकर भागा था। यह बात उक्त महिला के बेटे पुष्पराज को अखरती थी। इसी के चलते उसने अपने दोस्त निकेंद्र के साथ मिलकर उसकी हत्या का प्लान तैयार किया था।
निकेंद्र इस हत्याकांड में क्यों हुआ शामिल
पुलिस के अनुसार जब पुष्पराज ने निकेंद्र रावत के साथ यह बात शेयर की कि, वह अपने सौतेले मामा की हत्या करना चाहता है। अगर वह उसके साथ इस घटनाक्रम को अंजाम देगा तो वह इसके एवज में उसे मोटी रकम देगा। चूंकि निकेंद्र पर काफी कर्जा था, इसलिए उसे लगा कि पुष्पराज से मिलने वाले पैसे से वह अपना कर्जा चुका देगा। इसी लालच में आकर निकेंद्र इस हत्याकांड में उसका सहयोगी बना। रणनीति के तहत पुष्पराज अपने मामा के बेटे प्रांजल (मुनेश के सौतेले भतीजे) की शादी का कार्ड देने के बहाने मुनेश के घर पहुंचा। गेट मुनेश की जगह रामसखी ने खोला। पुष्पराज जैसे ही अपनी सौतेली नानी के पैर छूने के लिए झुका, वैसे ही निकेंद्र ने रामसखी के सिर में गोली मार दी।
गिरफ्तारी के समय गिर्राज जी की परिक्रमा दे रहा था निकेंद्र
पुलिस ने इस हत्याकांड के खुलासे के लिए पूरे परिवार की कुंडली तैयार की और हर व्यक्ति पर नजर रखी, उनसे बार-बार पूछताछ की। विश्वसनीय सूत्र बताते हैं कि इस दौरान पुष्पराज की गतिविधियां संदिग्ध नजर आईं। पुष्पराज से जब क्रॉस पूछताछ की गई तो वह टूट गया, उसने निकेंद्र के साथ हत्या करना स्वीकार कर लिया। खास बात यह रही कि निकेंद्र हत्या की वारदात को अंजाम देने के बाद पहले खाटू श्याम के दर्शन करने के लिए पहुंचा। इसके बाद वह गिर्राज जी के दर्शन करने के लिए पहुंचा। बताया जा रहा है कि जब निकेंद्र को पुलिस ने गिरफ्तार किया तो वह गिर्राज जी की परिक्रमा दे रहा था।