
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। सिंहस्थ-2028 में प्रशासन की भूमिका बदलने जा रही है। अब अधिकारी किसी घटना के बाद पहुंचकर निर्णय नहीं लेंगे, बल्कि घटना से पहले ही कार्रवाई शुरू हो जाएगी। इसके लिए पूरे मेला प्रबंधन को प्रेडिक्टिव गवर्नेंस Model पर शिफ्ट किया जा रहा है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पहले संभावित खतरे का अनुमान लगाएगा और उसके बाद पुलिस, नगर निगम, स्वास्थ्य, परिवहन और अन्य विभाग कार्रवाई करेंगे। यही सिंहस्थ-2028 की सबसे बड़ी प्रशासनिक क्रांति होगी।
अब तक सिंहस्थ का संचालन अनुभव, वायरलेस संदेशों, मैदानी फीडबैक और अधिकारियों के निर्णय पर चलता था। अब पहली बार निर्णय का आधार रियल टाइम डेटा होगा। लाखों डिजिटल इनपुट का विश्लेषण कर AI यह बताएगा कि अगले कुछ मिनटों में किस घाट पर भीड़ खतरनाक स्तर तक पहुंच सकती है, किस सड़क पर जाम बनने वाला है, किस अस्पताल पर मरीजों का दबाव बढ़ेगा या किस क्षेत्र में सफाई व्यवस्था प्रभावित होने वाली है।
सरकार राष्ट्रीय टेक-हैकाथान से चयनित तकनीकी समाधानों को इसी आपरेटिंग सिस्टम का आधार बना रही है। इन्हें एकीकृत कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से जोड़कर पूरे मेला क्षेत्र की डिजिटल निगरानी की जाएगी। इससे प्रशासन पहली बार रिएक्टिव एडमिनिस्ट्रेशन से प्रेडिक्टिव एडमिनिस्ट्रेशन में प्रवेश करेगा।
प्रदेश सरकार सिंहस्थ-2028 के लिए लगभग 19 हजार करोड़ रुपये की अधोसंरचना विकसित कर रही है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर इससे भी बड़ा बदलाव डिजिटल ऑपरेटिंग सिस्टम होगा। अधिकारियों के अनुसार लक्ष्य केवल स्मार्ट मेला बनाना नहीं, बल्कि ऐसा निर्णय तंत्र तैयार करना है, जो डेटा के आधार पर सेकेंडों में फैसले ले सके।
सिंहस्थ-2028 में निर्णय डेटा और AI के विश्लेषण के आधार पर होंगे। हमारा लक्ष्य हर चुनौती का पूर्वानुमान लगाकर समय रहते समाधान सुनिश्चित करना है।
रौशन कुमार सिंह, कलेक्टर, उज्जैन।