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उज्जैन में भक्ति के बल से आगे बढ़ेगा भगवान जगन्नाथ का रथ, श्रद्धालु हाथों से खींचेंगे डोर

आषाढ़ शुक्ल द्वितीया पर गुरुवार को धर्मधानी उज्जैन भगवान जगन्नाथ की भक्ति में सराबोर नजर आएगी। ''जय जगन्नाथ'' के गगनभेदी उद्घोष, भजन-कीर्तन की मधुर स्...और पढ़ें

By Rajesh VermaEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Thu, 16 Jul 2026 09:48:01 AM (IST)Updated Date: Thu, 16 Jul 2026 09:51:46 AM (IST)
उज्जैन में भक्ति के बल से आगे बढ़ेगा भगवान जगन्नाथ का रथ, श्रद्धालु हाथों से खींचेंगे डोर
भगवान जगन्नाथ। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. उज्जैन शहर में आज दो स्थानों से निकलेगी भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा
  2. भजन-कीर्तन की मधुर स्वर लहरियों और जय जगन्नाथ के उद्धोष से गूंजेगी धर्मधानी
  3. भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथ पर सवार होकर भक्तों को दर्शन देने निकलेंगे

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। आषाढ़ शुक्ल द्वितीया पर गुरुवार को धर्मधानी उज्जैन भगवान जगन्नाथ की भक्ति में सराबोर नजर आएगी। ''जय जगन्नाथ'' के गगनभेदी उद्घोष, भजन-कीर्तन की मधुर स्वर लहरियां और ढोल-ढमाकों की गूंज के बीच शहर में दो स्थानों से रथ यात्रा निकाली जाएगी।

भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथ पर सवार होकर भक्तों को दर्शन देने निकलेंगे। श्रद्धालु आस्था की डोर थामे अपने हाथों से भगवान का रथ खींचेंगे। प्रमुख मार्गों से होते हुए यात्रा गुंडिचा नगरी पहुंचेगी, जहां विशेष पूजा-अर्चना के बाद भगवान आठ दिन विश्राम करेंगे। जानिए यात्राएं कब और कहां से निकाली जाएंगी...


पहली रथ यात्रा : इस्कान मंदिर

  • स्थान : इंदिरा नगर चौराहा
  • समय : दोपहर 1.30 बजे

यह खास : इस्कान की रथ यात्रा में तीन ध्वज शामिल रहेंगे। भगवान बलदाऊ तालधवज रथ पर सवार होंगे, यह रथ सबसे आगे रहेगा। इसके बाद बहन सुभद्रा दर्पदलन रथ पर सवार होकर निकलेंगी। सबसे पीछे भगवान जगन्नाथ नंदीघोष रथ पर सवार होकर भक्तों को दर्शन देने निकलेंगे। यात्रा में भजन मंडल, झांकियां आदि शामिल रहेंगे।

इस्कॉन की रथ यात्रा दोपहर 1.30 बजे अनाज मंडी चौराहा से निकाली जाएगी। इसमें भगवान जगन्नाथ को 35 फीट ऊंचे नंदीघोष रथ में, भगवान बलराम को तालध्वज रथ में और देवी सुभद्रा को दर्पदलन रथ में विराजमान करवाया जाएगा। राघव पंडित दास के अनुसार प्रभु की विशेष पोशाक तैयार करने के लिए बंगाल से 10 कलाकारों को बुलाया था। जिन्होंने दो माह में रेशमी वस्त्रों और जापान के हीरे, मोतियों और जरी से पोशाक तैयार की है। तीनों रथों को श्रद्धालु अपने हाथों से खींचेंगे।

यात्रा मार्ग : इंदिरा नगर चौराहा से शुरू होकर यात्रा, आगर रोड, चामुंडा चौराहा, टावर चौक होते हुए देवास रोड स्थित श्री महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ परिसर पहुंच कर संपन्न होगी।

दूसरी रथ यात्रा : खाती समाज

  • स्थान : जगदीश मंदिर कार्तिक चौक
  • समय : दोपहर 3 बजे

यह खास : खाती समाज की रथ यात्रा में भगवान बलदाऊ, बहन सुभद्रा तथा भगवान जगन्नाथ एक ही रथ पर विराजित रहेंगे। यह रथ जगन्नाथपुरी में निकलने वाली रथ यात्रा की तरह लकड़ी से बना विशाल रथ है। यात्रा में दो बैंड, दो अखाड़े, धार्मिक पृष्ठभूमि पर आधारित चार झांकियां तथा करीब दस हजार समाजजन शामिल रहेंगे।

कार्तिक चौक स्थित भगवान जगदीश मंदिर से खाती समाज दोपहर 2 बजे रथ यात्रा निकालेगा। इसमें 1200 गांव के लोग 100 साल पुराने लकड़ी का रथ को अपने हाथों से खींचेंगे। अरुण पटेल के अनुसार जिनमें बड़ी संख्या में महिला, पुरुष और बच्चे भी शामिल होंगे। इसके पहले मंदिर में भगवान जगदीश का अभिषेक व महाआरती की जाएगी। आरती के बाद भगवान के विग्रह को रथ में विराजमान करवाया जाएगा। आरती और भगवान के विग्रह को रथ में विराजमान करवाने के लिए बोली भी लगाई जाएगी।

यात्रा मार्ग : खाती समाज की रथ यात्रा कार्तिक चौक स्थित जगदीश मंदिर से शुरू होकर मोढ़ की धर्मशाला के रास्ते दानी गेट पहुंचेगी। यहां शिप्रा की छोटी रपट के समीप शिप्रा जी की आरती की जाएगी। इसके बाद यात्रा ढाबा रोड कमरी मार्ग चौराहा, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार, बक्षी बाजार होते हुए शाम 7 बजे तक पुन: जगदीश मंदिर पहुंचेगी।

आंखों में पट्टी बांधकर होती है भगवान जगन्नाथ की स्थापना, मूर्ति के लिए लकड़ी चुनने के नियम भी खास, जानें क्यों है यह मंदिर पूरी दुनिया में अनोखा