
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन : विजयादशमी पर मंगलवार को नगर सीमा लांघकर नए शहर फ्रीगंज पहुंचे राजाधिराज भगवान महाकाल का इंद्रदेव ने जलाभिषेक कर स्वागत किया।
जैसे ही भगवान महाकाल की सवारी पुराने शहर में देवासगेट की सीमा पार कर फ्रीगंज की ओर बढ़ी, आसमान में काले बादल घुमड़ने लगे। रजत पालकी के टावर चौक पहुंचते ही तेज बारिश शुरू हो गई।
बारिश की तेज बौछारों के बीच भी भक्त अपने आराध्य के दर्शन के लिए डटे रहे। झमाझम बरसात के बीच अवंतिकानाथ दशहरा मैदान पहुंचे तथा शमी वृक्ष और शस्त्र पूजन किया।

दशहरा मैदान पर भगवान महाकाल व शमी वृक्ष का पूजन करते कलेक्टर व एसपी। -नईदुनिया
बता दें कि इस बार वर्षा ऋतु में नगर में पर्याप्त बारिश नहीं हुई है। नदी, तालाब और जलाशय रीते पड़े हैं। ऐसे में भगवान महाकाल के नए शहर आगमन पर राहत की बूंदें बरसीं, तो भक्तों के चेहरे खिल उठे।
विजयादशमी पर मंगलवार को राजसी वैभव के साथ निकली भगवान महाकाल की सवारी में धर्म के साथ लोक कला और संस्कृति के विविध रंग दिखाई दिए। मंदिर समिति ने नगर सीमा लंघन की सवारी को इस बार अभूतपूर्व भव्यता प्रदान की।

चलित रथ पर चित्रकारी करती किशोरी। -मंदिर समिति
ढोल-मांदल की थाप पर जनजातीय नृत्यों की प्रस्तुति देते लोक कलाकार, तुलिका से कल्पनाओं में रंग भरते चित्रकार और सवारी मार्ग पर राजाधिराज के स्वागत में रंगोली सजाते कलाकारों को देख भक्त मुग्ध हो गए। दशहरा मैदान पर वेदपाठी बटुकों के सस्वर वेदपाठ ने त्रेतायुग की स्मृतियां जीवंत कर दी।
नगरवासियों में विजय पर्व का उल्लास ऐसा था कि झमाझम बारिश भी आस्था के इस उत्सव में खलल नहीं डाल सकी। महाकालेश्वर मंदिर से शाम 4 बजे शुरू हुई सवारी कोट मोहल्ला, गुदरी चौराहा, पटनी बाजार, गोपाल मंदिर, सराफा, सतीगेट, नई सड़क, दौलतगंज, मालीपुरा देवास गेट, नई सड़क, दौलतगंज, मालीपुरा, देवास गेट, चामुंडा चौराहा, टॉवर चौक होते हुए दशहरा मैदान पहुंची।

विजयादशमी पर निकली भगवान महाकाल की सवारी में उमड़ा आस्था का ज्वार। -प्रकाश प्रजापत
यहां कलेक्टर रौशन कुमार सिंह, एसपी प्रदीप शर्मा ने भगवान महाकाल व शमी वृक्ष का पूजन किया। पूजन के पश्चात सवारी परंपरागत मार्गों से रात करीब 8 बजे पुन: महाकाल मंदिर पहुंची।
सवारी में शामिल लोक कलाकारों के दल ने लोकगीतों पर अद्भुत नृत्य प्रस्तुतियां दी। नृत्य के विभिन्न भाव पक्षों को कलाकार ने शारीरिक संरचनाओं से प्रदर्शित किया इसे देखकर नगरवासी दंग रह गए। लोक वाद्यों की मंगल ध्वनि प्रस्तुतियों को रस रंजक बना रही थी।
दशहरा मैदान पर पालकी पूजन स्थल पर पहली बार वेद पारायण किया गया। श्री महाकालेश्वर वैदिक शोध संस्थान के साथ अन्य वेदपाठशालाओं में अध्ययनरत बटुकों ने पालकी के पहुचंते ही सस्वर वेद पाठ किया।
महाकाल की सवारी में पहली बार कला के विविध पक्षों को स्थान मिला। लोक कलाकार जहां लोक गीत,लोक संगीत व लोक नृत्य की प्रस्तुति दे रहे थे। वहीं किशोर जीवंत चित्रकारी के जरिए अपनी कला कौशल का प्रदर्शन करते चल रहे थे।
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