
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन : उज्जैन में सिंहस्थ के पूर्व मंदिरों, घाटों के विकास के लिए उज्जैन विकास प्राधिकरण 643.39 करोड़ रुयये खर्च करेगा। इसके लिए इंदौर में आयोजित मप्र अर्बन ग्रोथ कान्क्लेव 2.0 कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में उविप्रा और इंडियन ओवरसीज बैंक के बीच 643.39 करोड़ के टर्म लोन के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर हुए।
सिंहस्थ के पूर्व मंदिरों के विकास और आने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए उविप्रा और इंडियन ओवरसीज बैंक ने 643.39 करोड़ रुपये के टर्म लोन के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए। यह टर्म लोन 11 मंदिर, घाट और विरासत परियोजनों के लिए आंशिक वित्तपोषण करेगा।
इसकी कुल अनुमानित लागत 1124.52 करोड़ रुपये है। टर्म लोन के अलावा उविप्रा टेंपल बांड्स के पब्लिक इश्यू के माध्यम से 200 करोड़ रुपये जुटाने की योजना भी बना रहा है। ये यूडीए की परियोजना को धन जुटाने का अतिरिक्त आय का माध्यम बनेगा।
यूडीए द्वारा ली जाने वाली इस राशि का भुगतान मुख्य रूप से उन 11 परियोजनाओं से होने वाली आय से किया जाएगा। मूलधन, ब्याज और अन्य देय राशियों के पुनर्भुगतान की मुख्य जिम्मेदारी यूडीए की होगी। टर्म लोन के रूप में प्राप्त धन राशि से तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाओं को बेहतर बनाना, मंदिरों और घाटों के बुनियादी ढांचे को सुधारना, विरासत से जुड़ी सुविधाओं को मजबूत करना और सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत उज्जैन में एक बेहतर शहरी बुनियादी ढांचा तैयार किया जाएगा।
सिंहस्थ के दौरान लगभग 40 करोड़ तीर्थयात्रियों के आने की उम्मीद है। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, तुलसीराम सिलावट, प्रतिमा बागरी, उविप्रा अध्यक्ष रवि सोलंकी, हाउसिंग बोर्ड अध्यक्ष ओम जैन, सांसद शंकर ललवानी, विधायक गोलू शुक्ला, संजय दुबे, संकेत भोंडवे, संदीप सोनी, मनीष जोशी, हरि रमन, विपिन सिंह सतोरिया उपस्थित थे।
यह भी पढ़ें- एमपी के पर्यटन स्थलों पर तैनात होंगे AI गाइड, 130 भाषाओं में देंगे जवाब, उज्जैन सिंहस्थ 2028 में भी होगा उपयोग