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श्रावण-भाद्रपद मास में निकलने वाली महाकाल की सवारी में बिखरेंगे आस्था के साथ लोक संस्कृति के रंग

श्रावण-भाद्रपद मास में निकलने वाली भगवान महाकाल की सवारियों में इस बार आस्था के साथ लोक संस्कृति के रंग भी नजर आएंगे। सवारी में विभिन्न राज्यों के लोक...और पढ़ें

By Rajesh VermaEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Wed, 15 Jul 2026 10:30:04 AM (IST)Updated Date: Wed, 15 Jul 2026 10:30:04 AM (IST)
श्रावण-भाद्रपद मास में निकलने वाली महाकाल की सवारी में बिखरेंगे आस्था के साथ लोक संस्कृति के रंग
पालकी में विराजित भगवान महाकाल। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. चलित लोक नृत्य दलों के साथ निकलेंगी थीम आधारित झांकियां, देशभर के ख्यात बैंड भी बढ़ाएंगे राजसी वैभव
  2. सवारी में विभिन्न राज्यों के लोक कलाकार चलित प्रस्तुतियों के माध्यम से श्रद्धालुओं का मन मोहेंगे
  3. उन्हीं राज्यों की सांस्कृतिक विरासत को साकार करती आकर्षक झांकियां भी साथ चलेंगी

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। श्रावण-भाद्रपद मास में निकलने वाली भगवान महाकाल की सवारियों में इस बार आस्था के साथ लोक संस्कृति के रंग भी नजर आएंगे। सवारी में विभिन्न राज्यों के लोक कलाकार चलित प्रस्तुतियों के माध्यम से श्रद्धालुओं का मन मोहेंगे, जबकि उन्हीं राज्यों की सांस्कृतिक विरासत को साकार करती आकर्षक झांकियां भी साथ चलेंगी। देश के ख्यात बैंड अपने सुरों से अवंतिकानाथ के राजसी वैभव को और भव्यता प्रदान करेंगे।

महाकाल मंदिर की परंपरा में भगवान महाकाल की पूजा राजा के रूप में होती है। श्रावण-भाद्रपद मास में अवंतिकानाथ रजत पालकी में सवार होकर अपनी प्रजा का हाल जानने नगर भ्रमण पर निकलते हैं। प्रजा भी अपने राजा के स्वागत में पलक-पावड़े बिछाती है। पांच किलोमीटर लंबे पारंपरिक सवारी मार्ग पर चार घंटे तक श्रद्धा और भक्ति का उल्लास छाया रहता है।


जनजातीय सांस्कृतिक समूहों को भी जोड़ा गया है

सदियों पुरानी इस परंपरा में बैंड-बाजे, पुलिस का अश्वारोही दस्ता, पुलिस बैंड, भजन मंडलियां और शहर के प्रबुद्धजन शामिल होते रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में सवारी की गरिमा और सांस्कृतिक वैभव को बढ़ाने के लिए पारंपरिक भजन मंडलियों, झांझ-डमरू दलों के साथ जनजातीय सांस्कृतिक समूहों को भी जोड़ा गया है। इस बार आयोजन को और अधिक भव्य स्वरूप देने की तैयारी है।

लोक नृत्य दल सवारी के साथ चलते हुए अपनी पारंपरिक कला का प्रदर्शन करेंगे

विभिन्न राज्यों के लोक नृत्य दल सवारी के साथ चलते हुए अपनी पारंपरिक कला का प्रदर्शन करेंगे। विशेष बात यह रहेगी कि जिस राज्य का लोक दल प्रस्तुति देगा, उसी राज्य की सांस्कृतिक पहचान और लोक विरासत को दर्शाती झांकी भी उसके साथ चलेगी। इससे श्रद्धालुओं को भगवान महाकाल की सवारी में देश की विविध लोक परंपराओं की जीवंत झलक देखने का अवसर मिलेगा।

भगवान महाकाल की सवारी कब-कब

  • 03 अगस्त : श्रावण मास की पहली सवारी
  • 10 अगस्त : श्रावण मास की दूसरी सवारी
  • 17 अगस्त : श्रावण मास की तीसरी सवारी
  • 24 अगस्त : श्रावण मास की चौथी सवारी
  • 31 अगस्त : भाद्रपद मास की पहली सवारी
  • 07 सितंबर : श्रावण-भाद्रपद मास की राजसी सवारी

यह रहेगा सवारी मार्ग

महाकाल मंदिर से कोट मोहल्ला, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाड़ी होते हुए मोक्षदायिनी शिप्रा के रामघाट पहुंचेगी। यहां पूजन के पश्चात सवारी रामानुजकोट, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार होते हुए शाम 7 बजे पुन: मंदिर पहुंचकर संपन्न होगी।

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