
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन : विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर से सोमवार को निकलने वाली श्रावण-भाद्रपद मास की राजसी सवारी नए रंग और रूप में नजर आएगी।
संयोग यह है कि सिंहस्थ की थीम पर निकलने वाली राजसी सवारी पहली बार सिंहस्थ के लिए संवारे गए नव्य-भव्य-दिव्य मार्ग से गुजरेगी। सवारी में शामिल ईशा फाउंडेशन का कैलाश वाद्यम बैंड, सिंहस्थ पर आधारित झांकियां तथा 70 से अधिक भजन मंडलियां व पारंपरिक दल सवारी को सिंहस्थ की पेशवाई का स्वरूप प्रदान करेंगे। भक्तों के लिए नए मार्ग से राजसी सवारी को देखना सिंहस्थ से पहले महाकुंभ के आरंभ होने जैसा अनुभव रहेगा।
महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति तथा जिला प्रशासन द्वारा राजसी सवारी के स्वरूप को इस प्रकार सजाया गया है कि भक्तों को अवंतिकानाथ के राजसी वैभव के साथ सवारी के मार्ग पर उज्जैन की धार्मिक, सांस्कृतिक और लोक परंपरा व सिंहस्थ की पेशवाई का अहसास हो।

मनोरम प्रस्तुति देते कैलाश वाद्यम बैंड के कलाकार। (फाइल फोटो)
सिंहस्थ की पेश्वाई में सबसे आगे अनूठी वेशभूषा में वाद्य वादको का दल रहता है। राजसी सवारी में ईशा फाउंडेशन का कैलाश वाद्यम नादब्रह्म की परंपरा निभाएगा। दक्षिण भारतीय वाद्य परंपरा पर आधारित यह दल पहली बार भगवान महाकाल की राजसी सवारी में प्रस्तुति देगा। करीब 25 कलाकारों का दल भगवान शिव की आराधना में विशेष वाद्य प्रस्तुति देगा। वहीं करीब 70 भजन मंडलियां सवारी की अगवानी करते हुए पूरे मार्ग को भक्तिमय बनाएंगी।

अवंतिकानाथ महाकाल और मार्ग विस्तारीकरण के बाद वैभवशाली स्वरूप में समाने आया सती द्वार। (नईदुनिया)
मध्य प्रदेश सरकार सिंहस्थ 2028 में लगने वाले विश्व के सबसे बड़े आध्यात्मिक महाकुंभ के लिए धर्मधानी को तैयार करने में जुटी है। इसके लिए शहर के आंतरिक मार्गों को विस्तारित कर आवागमन के लिए अधिक सुगम बनाया जा रहा है। सात किलो मीटर लंबे महाकाल सवारी मार्ग का एक बड़ा हिस्सा इसका अंग है, जिसे विस्तारित कर नव्य, भव्य और दिव्य रूप में सजाया गया है। इस मार्ग पर प्राचीन सती द्वार एक बार फिर अपने वैभव के साथ अवंतिकानाथ की अगवानी के लिए तैयार है। मार्ग को सुंदर व आकर्षक रूप प्रदान करने के लिए विशेष पेवर ब्लाक भी लगाए जा रहे हैं।
सिंहस्थ की थीम पर निकलने वाली भगवान महाकाल की राजसी सवारी के स्वागत के लिए भी विशेष तैयारी की जा रही है। मंदिर प्रशासन के अनुसार राजसी सवारी में ड्रोन से पुष्प वर्षा की जाएगी। तीन प्रमुख स्थानों पर ड्रोन से पुष्प वर्षा का प्लान तैयार है। नगर भ्रमण पर रवाना होने से पहले मंदिर के शहनाई द्वार पर जब भगवान महाकाल को गार्ड आफ आनर दिया जाएगा, तब पहली बार ड्रोन से फूल बरसाए जाएंगे। इसके बाद शिप्रा तट पर पालकी पूजन के समय और फिर गोपाल मंदिर पर पूजन के समय पुष्प वर्षा होगी। गोपाल मंदिर पर सिंधिया राजवंश की परंपरा अनुसार केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भगवान महाकाल की पूजा अर्चना करेंगे।
राजसी सवारी के बाद भगवान महाकाल की अगली सवारी 20 अक्टूबर को विजयदशमी के दिन निकलेगी। अवंतिकानाथ शमी वृक्ष का पूजन करने नए शहर फ्रीगंज स्थित दशहरा मैदान जाएंगे। यहां कलेक्टर भगवान महाकाल व शमी वृक्ष का पूजन करेंगे। बता दें साल में एक बार दशहरे के दिन भगवान महाकाल नए शहर फ्रीगंज आते हैं। विजय दशमी पर शमी पूजन की परंपरा ज्योतिर्लिंग महाकाल की पूजन परंपरा का अहम हिस्सा है।
7 सितंबर सोमवार को परंपरा अनुसार शाम 4 बजे भगवान महाकाल की सवारी महाकालेश्वर मंदिर से शुरू होगी, जो कोटमोहल्ला, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाड़ी, होते हुए शाम करीब 5 बजे मोक्षदायिनी शिप्रा के रामघाट पहुंचेगी। यहां पुजारी शिप्रा जल से भगवान महाकाल का अभिषेक कर पूजा अर्चना करेंगे।
पूजन पश्चात सवारी रामानुजकोट, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, जगदीश मंदिर, ढाबारोड, टंकी चौराहा मिर्जा-नईम-बेग मार्ग, छोटा तेलीवाड़ा, कंठाल, सतीगेट, छोटा सराफा, छत्रीचौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार, गुदरी चौराहा होते हुए शाम 7.30 बजे तक पुन: मंदिर पहुंचेगी।
7 सितंबर को भगवान महाकाल की शाही सवारी और एमपीपीएससी की मुख्य परीक्षा एक ही दिन होने के कारण शासकीय कालिदास कन्या महाविद्यालय प्रबंधन ने जिला प्रशासन एवं यातायात विभाग से परीक्षार्थियों के लिए विशेष यातायात व्यवस्था करने का अनुरोध किया है।
परीक्षा सुबह 10 से दोपहर 1 बजे तक होगी, जबकि परीक्षार्थियों को परीक्षा केंद्र में सुबह 8:30 से 9:30 बजे तक प्रवेश दिया जाएगा। प्रबंधन ने परीक्षा केंद्र की ओर आने वाले मार्गों पर यातायात सुचारु रखने, आवश्यकतानुसार मार्गदर्शन एवं वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था करने का अनुरोध किया है, ताकि शाही सवारी के कारण किसी परीक्षार्थी को परीक्षा केंद्र पहुंचने में परेशानी न हो।