
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। ज्ञान, कला, वाणी और नव पल्लव का पर्व वसंत पंचमी आज मनाया जा रहा है। इसकी शुरुआत महाकाल के आंगन से हुई, तड़के 4 बजे भस्म आरती में पुजारी ने भगवान महाकाल को वसंत के पीले फूल व गुलाल अर्पित कर वसंत उत्सव मनाया। भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली सांदीपनि आश्रम में बच्चों का विद्या आरंभ संस्कार किया जा रहा है।
शिक्षण संस्थानों में ज्ञान की देवी माता सरस्वती का प्राकट्य उत्सव मनाया जा रहा है। वसंत पंचमी को अबूझ मुहूर्त माना गया है, इस दिन बिना पंचांग देखे शुभ मांगलिक कार्य किए जाते हैं। इस बार वसंत पचंमी पर तारा अस्त होने से विवाह के शुभ मुहूर्त नहीं हैं, लेकिन अबूझ मुहूर्त में विवाह समारोह हो रहे हैं।
ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में परंपरा अनुसार तड़के 4 बजे भस्म आरती में भगवान महाकाल का केसरिया पंचामृत से अभिषेक पूजन किया गया। इसके बाद भगवान को पीले वस्त्र धारण कराए गए। वसंत के पीले फूलों से भगवान का श्रृंगार किया गया। भगवान को सरसों के पीले फूल के रूप में वसंत अर्पित किया गया। इसके बाद केसरिया, पीले पकवानों का भोग लगाकर आरती की गई। शाम को संध्या आरती में भगवान को गुलाल अर्पित किया जाएगा।
पुष्टिमार्गीय वैष्णव संप्रदाय में वसंत पंचमी से 40 दिवसीय फाग उत्सव की शुरुआत हो गई है। प्रतिदिन राजभोग आरती में ठाकुरजी को गुलाल अर्पित किया जाएगा। होली उत्सव का यह सिलसिला फाल्गुन पूर्णिमा के अगले दिन डोल उत्सव तक चलेगा। फाल्गुन शुक्ल एकादशी से डोल तक ठाकुरजी चांदी की पिचकारी से टेसू के फूलों से बने रंग से होली खेलेंगे। वैष्णव संप्रदाय में वसंत पंचमी से गर्मी की शुरुआत मानी जाती है। इस दिन से ठाकुरजी की दिनचर्या गर्मी के अनुकूल होने लगेगी।
वसंत पंचमी ज्ञान की देवी माता सरस्वती के प्राकट्य का दिन है। इस दिन शिक्षण व कला संस्थानों में माता सरस्वती की पूजा अर्चना की गई। सिंहपुरी स्थित प्राचीन नील सरस्वती के मंदिर में माता सरस्वती का स्याही से अभिषेक किया जा रहा है। यह देश का एक मात्र मंदिर है, जहां देवी का स्याही से अभिषेक किया जाता है। परीक्षा में अव्वल आने के लिए विद्यार्थी यहां माता का आशीर्वाद लेने भी आते हैं।
भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली सांदीपनि आश्रम में वसंत पंचमी पर बच्चों का विद्या आरंभ संस्कार हो रहा है। मान्यता है भगवान श्रीकृष्ण ने भी यहां, इसी वैदिक परंपरा से विद्या अध्ययन की शुरुआत की थी। देशभर से माता पिता यहां अपने बच्चों को विद्या आरंभ कराने के लिए लेकर पहुंचे। बच्चों का पाटी पूजन कराकर विद्या अध्ययन की शुरुआत कराई गई।