• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • कोरोना वायरस
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • दतिया उपचुनाव
  • सावन माह
  • मानसून
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • ए आई बूटकैंप
  • वास्‍तु शास्‍त्र
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • उमरिया

जब अचानक सामने आई बाघिन से महज चार-पांच फुट की दूरी पर हुआ आमना-सामना

जंगल में बाघों की सुरक्षा के लिए गश्त करने वालों के पास यूं तो तरह-तरह की यादें हैं लेकिन पांच साल पुरानी अपनी एक रोंगटे खड़ी कर देने वाली याद को वन र...और पढ़ें

By SanjayKumar SharmaEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Wed, 29 Jul 2026 01:24:22 PM (IST)Updated Date: Wed, 29 Jul 2026 01:24:22 PM (IST)
जब अचानक सामने आई बाघिन से महज चार-पांच फुट की दूरी पर हुआ आमना-सामना
नजरें मिलीं और अगले ही पल उसने जोरदार दहाड़ लगाई।

HighLights

  1. पक्षियों का अवलोकन करते करते पुहंच गए थे
  2. नदी के किनारे-किनारे काफी दूर निकल आए
  3. मुलायम रेत और ठंडा पानी पैरों को राहत दे रहे थे

नईदुनिया प्रतिनिधि, उमरिया। हर दिन की तरह उस दिन भी वे अपने दो सहयोगियों के साथ बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के परिक्षेत्र पतौर की गंजरहा बीट में हलफल नदी के किनारे बर्ड वाचिंग के लिए पैदल गश्त पर निकले थे।

पक्षियों का अवलोकन करते हुए दूर निकल गए

नदी की मुलायम रेत और ठंडा पानी पैरों को राहत दे रहे थे। वे सभी पक्षियों का अवलोकन करते हुए नदी के किनारे-किनारे काफी दूर निकल आए।

सामना अचानक एक बाघिन से हो गया

देखते-देखते शाम होने लगी और धूप की तपिश भी कम हो गई। वापसी के समय जब वे नदी के उथले पानी से होकर चल रहे थे तब उनका सामना अचानक एक बाघिन से हो गया।

जंगल पूरी तरह शांत था, कहीं से भी आभास नहीं हो रहा था कि ...

वे सभी जूते हाथ में लिए आपस में बातचीत करते हुए आराम से आगे बढ़ रहे थे। जंगल पूरी तरह शांत था। कहीं से भी यह आभास नहीं हो रहा था कि आसपास कोई बाघ मौजूद हो सकता है।

अचानक आई बाघिन सामने

अचानक उनकी नजर रेत पर बने ताजे बाघ के पगमार्क पर पड़ी। वे उन्हें ध्यान से देखने के लिए एक कदम आगे बढ़े ही थे कि सामने घास के पैच से एक मादा बाघिन दिखाई दी। उनकी नजरें मिलीं और अगले ही पल उसने जोरदार दहाड़ लगाई।

न कुछ सोचने का समय था, न समझने का

इसी के साथ बाघिन दूसरी ओर भागी और वे सभी लोग भी सहज प्रतिक्रिया में जितनी तेजी से हो सकता था, उससे दूर भागे। उस क्षण जब बाघिन को उन्होंने देखा था वह उनसे महज चार-पांच फुट की दूरी पर थी। न कुछ सोचने का समय था, न समझने का कि क्या करना चाहिए। सब कुछ केवल दस सेकंड के भीतर घटित हो गया।


पगमार्क साफ बता रहे थे कि वे आसपास मौजूद थे

वे तुरंत नदी से बाहर निकलकर पास की पहाड़ी की ओर चले गए। कुछ देर रुककर आसपास देखा, लेकिन न बाघिन दिखाई दी और न उसके शावक। हालांकि उनके पगमार्क साफ बता रहे थे कि वे वहीं आसपास मौजूद थे।

उसके बच्चों से इतना नजदीकी सामना होगा

उस घटना के बाद वे तीनों कुछ देर तक स्तब्ध रहे। मन में बार-बार बाघिन का वही दृश्य और उसके शावकों के पदचिह्न घूमते रहे। उनके पास न बचाव की तैयारी का समय था और न ही कभी कल्पना की थी कि बाघिन और उसके बच्चों से इतना नजदीकी सामना होगा।

वह पल आज भी स्मृतियों में उतना ही जीवंत

उस घटना को पाँच वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन वह पल आज भी स्मृतियों में उतना ही जीवंत है। जब भी वे और उनके साथी उस दिन को याद करते हैं, चेहरे पर अनायास मुस्कान आ जाती है और मन में यह एहसास भी कि जंगल में हर कदम सतर्कता और प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश देता है।

यह भी पढ़ें- जबलपुर के बरगी समेत प्रदेश के बांधों में पानी कम, गहराया बिजली संकट