
नईदुनिया प्रतिनिधि, उमरिया। बांधवगढ़ से निकले दो जंगली हाथियों ने जंगलों के बीच करीब ढाई सौ किलोमीटर की दूरी तय कर प्रयागराज के जंगलों तक पहुंचकर वन्यजीव विशेषज्ञों के सामने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
रीवा और मिर्जापुर के रास्ते हाथियों की यह लंबी आवाजाही महज एक असामान्य घटना नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश से उत्तर प्रदेश तक हाथियों की संभावित आवाजाही और नए वन्यजीव गलियारे की तस्वीर भी सामने ला सकती है।
खास बात यह है कि बांधवगढ़-संजय टाइगर रिजर्व क्षेत्र में हाथियों की आवाजाही, उनके आवास उपयोग और मानव-हाथी संघर्ष वाले संवेदनशील इलाकों को समझने के लिए तीन साल का विज्ञानी अध्ययन प्रस्तावित है।
भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून के शोधकर्ताओं के मार्गदर्शन में होने वाले इस अध्ययन में अब इन दोनों हाथियों की लंबी यात्रा एक अहम नया अध्याय जोड़ सकती है।
यदि उनके पूरे मार्ग और ठहराव वाले क्षेत्रों का विज्ञानी विश्लेषण होता है तो हाथियों के पारंपरिक आवागमन से आगे बढ़कर नए संभावित कारिडोर, उनके बदलते व्यवहार और भविष्य के मानव-हाथी संघर्ष वाले क्षेत्रों को समझने में मदद मिल सकती है।
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