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ढाई सौ किलोमीटर की हाथी चाल, उमरिया के बांधवगढ़ से प्रयागराज तक नया रास्ता

यदि उनके पूरे मार्ग और ठहराव वाले क्षेत्रों का विज्ञानी विश्लेषण होता है तो हाथियों के पारंपरिक आवागमन से आगे बढ़कर नए संभावित कारिडोर, उनके बदलते व्य...और पढ़ें

By SanjayKumar SharmaEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Tue, 08 Sep 2026 03:56:57 PM (IST)Updated Date: Tue, 08 Sep 2026 03:56:57 PM (IST)
ढाई सौ किलोमीटर की हाथी चाल, उमरिया के बांधवगढ़ से प्रयागराज तक नया रास्ता
वन्यजीव विशेषज्ञों के सामने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

HighLights

  1. यह लंबी आवाजाही एक असामान्य घटना नहीं
  2. रीवा-मिर्जापुर के रास्ते पहुंचे दो जंगली हाथी
  3. विज्ञानी अध्ययन में जुड़ सकता है नए गलियारा

नईदुनिया प्रतिनिधि, उमरिया। बांधवगढ़ से निकले दो जंगली हाथियों ने जंगलों के बीच करीब ढाई सौ किलोमीटर की दूरी तय कर प्रयागराज के जंगलों तक पहुंचकर वन्यजीव विशेषज्ञों के सामने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

नए वन्यजीव गलियारे की तस्वीर भी सामने आए

रीवा और मिर्जापुर के रास्ते हाथियों की यह लंबी आवाजाही महज एक असामान्य घटना नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश से उत्तर प्रदेश तक हाथियों की संभावित आवाजाही और नए वन्यजीव गलियारे की तस्वीर भी सामने ला सकती है।

तीन साल का विज्ञानी अध्ययन प्रस्तावित है

खास बात यह है कि बांधवगढ़-संजय टाइगर रिजर्व क्षेत्र में हाथियों की आवाजाही, उनके आवास उपयोग और मानव-हाथी संघर्ष वाले संवेदनशील इलाकों को समझने के लिए तीन साल का विज्ञानी अध्ययन प्रस्तावित है।

लंबी यात्रा एक अहम नया अध्याय जोड़ सकती

भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून के शोधकर्ताओं के मार्गदर्शन में होने वाले इस अध्ययन में अब इन दोनों हाथियों की लंबी यात्रा एक अहम नया अध्याय जोड़ सकती है।

मानव-हाथी संघर्ष वाले क्षेत्रों को समझने में मदद मिलेगी

यदि उनके पूरे मार्ग और ठहराव वाले क्षेत्रों का विज्ञानी विश्लेषण होता है तो हाथियों के पारंपरिक आवागमन से आगे बढ़कर नए संभावित कारिडोर, उनके बदलते व्यवहार और भविष्य के मानव-हाथी संघर्ष वाले क्षेत्रों को समझने में मदद मिल सकती है।

  • बांधवगढ़ से प्रयागराज तक करीब 250 किमी की यात्रा।
  • रीवा-मिर्जापुर के रास्ते हाथियों की नई राह।
  • तीन साल के विज्ञानी अध्ययन में जुड़ सकता है नया अध्याय।
  • संभावित नए हाथी कारिडोर की तलाश अहम।

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